मेडिकल कॉलेज को मिलेगी विशिष्ट पहचान
इस दौरान जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला सहित अन्य चिकित्सा शिक्षकों के साथ बैठक में इसकी जानकारी दी थी। जीएसवीएम मेडिकल कालेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला ने इसकी पुष्टि की। उन्होंने बताया कि अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल यूनिवर्सिटी, लखनऊ का कॉलेज बनने पर जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज को कई मायनों में विशिष्ट पहचान मिलेगी।
प्रति फैकल्टी पांच लाख रुपये तक की राशि उपलब्ध होगी
यहां विश्वविद्यालय के अन्य संबद्ध कॉलेज भी चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में योगदान दे रहे हैं, वहीं जीएसवीएम की अपनी कुछ खास विशेषताएं होंगी जो इसे अलग बनाएंगी। इस कॉलेज में शोध के लिए मिलने वाला बढ़ावा और वित्तीय सहायता चिकित्सा शिक्षकों को इसके लिए और प्रेरित करेगी। हर शोध परियोजना में प्रति फैकल्टी पांच लाख रुपये तक की राशि उपलब्ध होगी।
पहली बार शोध के लिए मिलेंगे 35 हजार
पहली बार एमबीबीएस के छात्रों को भी अपने शोध प्रोजेक्ट के लिए 35,000 रुपये आवंटित किए जाएंगे। इससे स्नातक स्तर पर ही छात्रों में शोध की संस्कृति विकसित होगी। अन्य कॉलेजों में स्नातक स्तर पर शोध को इतना अधिक वित्तीय समर्थन शायद ही मिलता हो। इसके अलावा राष्ट्रीय स्तर की कांफ्रेंस के लिए प्रति वर्ष एक लाख रुपये और दो - दो साल में अंतरराष्ट्रीय स्तर की कांफ्रेंस के लिए पांच-पांच लाख रुपये बजट आवंटित होगा।
अत्याधुनिक उपकरणों से लैस होगी लैब
जीएसवीएम में 20 करोड़ रुपये की लागत से स्किल लैब बनेगी। प्राचार्य ने बताया कि यह लैब अत्याधुनिक उपकरणों से लैस होगी। फिलहाल इस प्रयोगशाला में एमबीबीएस के छात्र-छात्राओं को लेप्रोस्कोपिक कंप्यूटर सिमुलेटर और रोबोटिक सर्जरी का प्रशिक्षण दिया जाएगा। अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल यूनिवर्सिटी का हिस्सा बनने से जीएसवीएम को राष्ट्रीय स्तर पर अधिक पहचान मिलेगी। विश्वविद्यालय के संसाधनों और नेटवर्क का लाभ इसे मिलेगा।
कॉलेज से संबद्ध हैं पांच अस्पताल
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज से पांच अस्पताल संबद्ध हैं। इनमें हैलट, अपर इंडिया जच्चा-बच्चा अस्पताल, बाल रोग चिकित्सालय, मुरारी लाल चेस्ट अस्पताल, संक्रामक रोग चिकित्सालय हैं।