किशोरों और युवाओं में बर्दाश्त करने की क्षमता कम हो रही है। जरा सी बात पर वे अवसाद में आ जाते हैं। आवेगी निर्णय पर भी नियंत्रण नहीं रख पाते और घातक कदम उठा लेते हैं। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के मनोरोग विभाग के बाल एवं किशोरावस्था क्लीनिक में ऐसे मामले लगातार आ रहे हैं। मनोरोगियों के हिस्ट्री से पता चला है कि इसके लिए दुलार भरी पैरेंटिंग भी जिम्मेदार है।
हर चीज तुरंत सुलभ होने पर वे कोई अनचाही घटना होने पर तनाव में आ जाते हैं। किशोरों और युवाओं के बदलते पर मिजाज पर जो अध्ययन किया गया है, उसमें हर एक मामले में मोबाइल की स्क्रीन का दखल भी मिला है। मनोरोग प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष डॉ. धनंजय चौधरी का कहना है कि संयुक्त परिवार टूटने और एकाकी परिवार होने से मां-बाप दुलार में बच्चों की हर बात जल्दी मान लेते हैं।