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Kanpur: जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज होगा हाईटेक, 591 करोड़ से बदलेगी सूरत, हैलट में बनेगा नौ मंजिला OPD कॉम्प्लेक्स

Fri, 03 Jul 2026 10:52 PM IST
Himanshu Awasthi मनोज चौरसिया, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur News: जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज और संबद्ध अस्पतालों के लिए 591 करोड़ रुपये की 10 बड़ी परियोजनाओं को डीजीएमई ने मंजूरी दे दी है। इसमें हैलट में नौ मंजिला ओपीडी कॉम्प्लेक्स, नए हॉस्टल और अत्याधुनिक रिसर्च लैब का निर्माण शामिल है।
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जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में रिसर्च लैब, न्यू ओपीडी ब्लॉक, दो हॉस्टलों के प्रस्तावों सहित 10 परियोजनाओं को चिकित्सा शिक्षा महानिदेशक (डीजीएमई) ने हरी झंडी दे दी है। इन कार्यों की अनुमानित लागत 591 करोड़ रुपये है। इन विकास कार्यों के लिए 183.10 करोड़ की पहली किस्त के लिए सैद्धांतिक सहमति भी मिल गई है। हैलट में नौ मंजिला ओपीडी कॉम्प्लेक्स और मुरारीलाल चेस्ट हॉस्पिटल में ओपीडी ब्लॉक का निर्माण होगा। इससे मरीजों को काफी राहत मिलेगी।

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उत्तर प्रदेश की चिकित्सा शिक्षा महानिदेशक व चिकित्सा शिक्षा विभाग की सचिव डॉ. सारिका मोहन की अध्यक्षता में 30 जून को लखनऊ में कानपुर, गोरखपुर और अयोध्या मेडिकल कॉलेजों और इनसे संबद्ध अस्पतालों में प्रस्तावित विकास परियोजनाओं के संबंध में बैठक हुई। इसमें जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला सहित तीनों कॉलेजों के प्राचार्यों ने अपने-अपने कॉलेजों और संबद्ध अस्पतालों के लिए बनाई गई परियोजनाओं का प्रस्तुतीकरण किया।

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परियोजनाओं को डीजीएमई ने दी मंजूरी
सचिव ने इन परियोजनाओं की उपयोगिता, लागत आदि से संबंधित सवाल भी पूछे। साइड प्लान, ले-आउट प्लान भी देखे। इसके बाद जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज की परियोजनाओं को डीजीएमई ने मंजूरी दी । हैलट अस्पताल परिसर में जीटी रोड की तरफ ओपीडी ब्लॉक के लिए 4500 वर्गमीटर जमीन चिह्नित की गई है। इसमें डबल बेसमेंट, ग्राउंड फ्लोर और उसके ऊपर सात मंजिल बनेंगी। इसकी अनुमानित लागत 183 करोड़ रुपये है।

4500 वर्गमीटर जमीन पर नया भवन बनेगा
हर मंजिल में अलग-अलग तरह की बीमारियों के चिकित्सा विशेषज्ञ मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण करेंगे। फिलहाल ओपीडी में रोज ढाई-तीन हजार मरीज आते हैं। वहीं, चेस्ट अस्पताल परिसर में गेट से मुख्य भवन मार्ग के दाहिनी तरफ 4500 वर्गमीटर जमीन पर नया भवन बनेगा। करीब 48 करोड़ की लागत से बनने वाले इस भवन में बेसमेंट, ग्राउंड फ्लोर और उसके ऊपर तीन मंजिल बनेंगी। इसकी एक मंजिल में ओपीडी ब्लॉक, दूसरी में आईसीयू और तीसरी में प्राइवेट रूम बनेंगे।

चिकित्सा शिक्षा विभाग ने जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज और इससे संबद्ध अस्पतालों की 10 परियोजनाओं को हरी झंडी दे दी है। अब इन प्रस्तावों को स्वीकृति के लिए शासन और वहां से व्यय वित्त समिति में भेजा जाएगा। इन कार्यों के लिए पहली किस्त के रूप में 183.10 करोड़ रुपये जारी होंगे। शेष धन दो किस्तों में मिलेगा। इन परियोजनाओं में से दो 50-50 करोड़ से ज्यादा की हैं] जिन्हें पीडब्ल्यूडी के माध्यम से कराया जाएगा।  -डॉ. संजय काला, प्राचार्य, जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज

ये कार्य होंगे
  • 183 करोड़ रुपये से नौ मंजिला ओपीडी कॉम्प्लेक्स का निर्माण।
  • 48 करोड़ से मुरारी लाल चेस्ट अस्पताल में ओपीडी ब्लॉक, आईसीयू, प्राइवेट रूम के लिए नए भवन का निर्माण।
  • 25 करोड़ से कॉलेज ग्राउंड में स्टेडियम का निर्माण।
  • 30 करोड़ से प्रशासनिक भवन का सुंदरीकरण व नवीनीकरण।
  • करीब 50 करोड़ से रिसर्च लैब का निर्माण।
  • करीब 48 करोड़ से यूजी गर्ल्स हॉस्टल का निर्माण।
  • करीब 49 करोड़ से पीजी मैरिड हॉस्टल का निर्माण।
  • करीब 47 करोड़ से पैरामेडिकल बिल्डिंग निर्माण।
  • 48 करोड़ से टाइप-फाइव के आवासों का निर्माण।
  • 46 करोड़ से टाइप-दो, तीन आवासों का निर्माण।

आठ मंजिला यूजी गर्ल्स हॉस्टल में होंगे 600 बेड
मौजूदा समय में एमबीबीएस प्रथम वर्ष की छात्राओं को यूजी गर्ल्स हॉस्टल में अलग-अलग कमरा मिलना तो दूर एक-एक कमरे में कई छात्राओं को रहना पड़ता है। इससे रहने में दिक्कत के साथ ही पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका रहती है। इसके मद्देनजर 4500 वर्गमीटर जमीन पर आठ मंजिला नया यूजी गर्ल्स हॉस्टल बनेगा। इसमें 600 बेड होंगे। इसी तरह मेडिकल कॉलेज परिसर में बने पीजी हॉस्टल के बगल में पीजी मैरिड छात्रावास बनेगा। इसमें ग्राउंड फ्लोर समेत आठ मंजिलें बनेंगी। 3000 स्क्वायर फीट में पैरामेडिकल भवन भी बनाने का खाका खींचा गया है जो छह मंजिला होगा।

एनिमल पार्क स्थल में बनेगी रिसर्च लैब
मेडिकल कॉलेज परिसर में ही क्षतिग्रस्त हो चुके एनिमल पार्क की करीब 1500 वर्गमीटर जमीन पर रिसर्च लैब बनेगी। इसमें ग्राउंड फ्लोर और उसके ऊपर सात मंजिल बनेंगी। इसमें एमबीबीएस छात्र अत्याधुनिक उपकरणों, डिजिटल आदि के माध्यम से चिकित्सा शिक्षा ग्रहण कर सकेंगे।
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आवासों की समस्या होगी खत्म
मेडिकल कॉलेज और इससे संबद्ध अस्पतालों के डॉक्टरों और कर्मचारियों की आवास की समस्या के समाधान के लिए कॉलेज प्रशासन ने प्रोफेसरों के लिए टाइप-फाइव आवास बनवाने की कार्ययोजना तैयार की है। इसी तरह पैरामेडिकल स्टाफ सहित अन्य कर्मचारियों के लिए टाइप-दो व टाइप-तीन श्रेणी के आवास बनने का खाका खींचा है। इन्हें सात मंजिला बनाया जाएगा।
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