परियोजनाओं को डीजीएमई ने दी मंजूरी
सचिव ने इन परियोजनाओं की उपयोगिता, लागत आदि से संबंधित सवाल भी पूछे। साइड प्लान, ले-आउट प्लान भी देखे। इसके बाद जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज की परियोजनाओं को डीजीएमई ने मंजूरी दी । हैलट अस्पताल परिसर में जीटी रोड की तरफ ओपीडी ब्लॉक के लिए 4500 वर्गमीटर जमीन चिह्नित की गई है। इसमें डबल बेसमेंट, ग्राउंड फ्लोर और उसके ऊपर सात मंजिल बनेंगी। इसकी अनुमानित लागत 183 करोड़ रुपये है।
4500 वर्गमीटर जमीन पर नया भवन बनेगा
हर मंजिल में अलग-अलग तरह की बीमारियों के चिकित्सा विशेषज्ञ मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण करेंगे। फिलहाल ओपीडी में रोज ढाई-तीन हजार मरीज आते हैं। वहीं, चेस्ट अस्पताल परिसर में गेट से मुख्य भवन मार्ग के दाहिनी तरफ 4500 वर्गमीटर जमीन पर नया भवन बनेगा। करीब 48 करोड़ की लागत से बनने वाले इस भवन में बेसमेंट, ग्राउंड फ्लोर और उसके ऊपर तीन मंजिल बनेंगी। इसकी एक मंजिल में ओपीडी ब्लॉक, दूसरी में आईसीयू और तीसरी में प्राइवेट रूम बनेंगे।
चिकित्सा शिक्षा विभाग ने जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज और इससे संबद्ध अस्पतालों की 10 परियोजनाओं को हरी झंडी दे दी है। अब इन प्रस्तावों को स्वीकृति के लिए शासन और वहां से व्यय वित्त समिति में भेजा जाएगा। इन कार्यों के लिए पहली किस्त के रूप में 183.10 करोड़ रुपये जारी होंगे। शेष धन दो किस्तों में मिलेगा। इन परियोजनाओं में से दो 50-50 करोड़ से ज्यादा की हैं] जिन्हें पीडब्ल्यूडी के माध्यम से कराया जाएगा। -डॉ. संजय काला, प्राचार्य, जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज
आठ मंजिला यूजी गर्ल्स हॉस्टल में होंगे 600 बेड
मौजूदा समय में एमबीबीएस प्रथम वर्ष की छात्राओं को यूजी गर्ल्स हॉस्टल में अलग-अलग कमरा मिलना तो दूर एक-एक कमरे में कई छात्राओं को रहना पड़ता है। इससे रहने में दिक्कत के साथ ही पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका रहती है। इसके मद्देनजर 4500 वर्गमीटर जमीन पर आठ मंजिला नया यूजी गर्ल्स हॉस्टल बनेगा। इसमें 600 बेड होंगे। इसी तरह मेडिकल कॉलेज परिसर में बने पीजी हॉस्टल के बगल में पीजी मैरिड छात्रावास बनेगा। इसमें ग्राउंड फ्लोर समेत आठ मंजिलें बनेंगी। 3000 स्क्वायर फीट में पैरामेडिकल भवन भी बनाने का खाका खींचा गया है जो छह मंजिला होगा।
आवासों की समस्या होगी खत्म
मेडिकल कॉलेज और इससे संबद्ध अस्पतालों के डॉक्टरों और कर्मचारियों की आवास की समस्या के समाधान के लिए कॉलेज प्रशासन ने प्रोफेसरों के लिए टाइप-फाइव आवास बनवाने की कार्ययोजना तैयार की है। इसी तरह पैरामेडिकल स्टाफ सहित अन्य कर्मचारियों के लिए टाइप-दो व टाइप-तीन श्रेणी के आवास बनने का खाका खींचा है। इन्हें सात मंजिला बनाया जाएगा।