सेंट्रल स्टेशन में रूफटॉप लॉन्ज बनाया जा रहा है, जिसके लिए सबसे पहले प्लेटफार्म आठ और नौ पर कार्य किया जाएगा। यहां यात्रियों की सारी सुविधाएं रहेंगी। यात्री ट्रेन आने से कुछ देर पहले ही प्लेटफार्म पर पहुंच सकेंगे। -संतोष त्रिपाठी, एसीएम रेलवे
अपने मेडिकल कॉलेज में हो सकेगी वायरस के नए स्ट्रेन की जांच
प्रदेश के राजकीय मेडिकल कॉलेजों में जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में पहली वायरोलॉजी लैब खुलेगी। इससे वायरस के नए स्ट्रेन की जांच हो जाएगी। जिन वायरस की जांचें अभी पैथोलॉजी में नहीं होतीं, उनकी भी पहचान हो जाएगी। इससे रोगियों के इलाज में आसानी होगी। वायरोलॉजी लैब के लिए साइंटिस्ट एफ और ई के पद सृजित हो गए हैं। इनकी नियुक्ति के लिए कॉलेज प्रबंधन ने शासन को प्रस्ताव भेजा है। मेडिकल रिसर्च यूनिट वायरोलॉजी के क्षेत्र में शोध कराएगी।
जीएसवीएम में पहली वायरोलॉजी लैब खुलेगी
मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में वायरोलॉजी लैब खुलेगी। कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला ने बताया कि वायरोलॉजी लैब खुलने से 17 जिलों के रोगियों को जांच की सुविधा उपलब्ध हो जाएगी। कानपुर नगर मंडल के अलावा समूचे बुंदेलखंड, झांसी और लखनऊ मंडल के जिलों के रोगियों की जांच हो सकेगी। उन्होंने बताया कि नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) के वायरोलॉजी लैब खोलने के निर्देश हैं।
दो साइंटिस्ट की नियुक्ति के लिए कॉलेज प्रबंधन ने भेजा प्रस्ताव
माइक्रोबायोलॉजी विभाग में डेंगू, चिकुनगुनिया, हेपेटाइटिस बी और सी आदि वायरस की जांच हो रही है। डॉ. काला ने बताया कि अभी केजीएमयू और एसजीपीजीआई लखनऊ में वायरोलॉजी लैब है। अभी जो सैंपल एकत्र किए जाते हैं, उन्हें जांच के लिए केजीएमएयू लखनऊ के माइक्रबायोलॉजी विभाग भेजा जाता है। लखनऊ में पूरे प्रदेश से सैंपल आते हैं। इससे जांच रिपोर्ट आने में देर लग जाती है।
कानपुर परिक्षेत्र में 40 वायरल स्ट्रेन
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला ने बताया कि कानपुर परिक्षेत्र और आसपास के जिलों में 40 वायरल स्ट्रेन हैं। कोविड काल के बाद वायरल संक्रमण की स्थिति में बदलाव आया है। वायरल निमोनिया, वायरल डायरिया, इंसेफ्लाइटिस, मेनिनजाइटिस और सांस तंत्र के रोगियों की संख्या बढ़ गई है। हाई ग्रेड फीवर कुछ अलग तरह के लक्षणों के साथ फैल रहा है। ऐसे में वायरस की पहचान होनी जरूरी है।
100 कूड़ा गाड़ियां खरीदी जाएंगी, 36 कूड़ाघर बनेंगे
घरों से कूड़ा उठाने के लिए नगर निगम 100 कूड़ा गाड़ियां खरीदेगा। इसके साथ ही 36 कूड़ाघर बनेंगे। पानी की किल्लत और सीवर समस्या भी दूर करने के लिए नगर निगम ने 150 करोड़ के प्रस्वाव तैयार किए हैं। पांच फरवरी को होने वाली बैठक में इन प्रस्तावों पर मुहर लगेगी। आगामी लोकसभा चुनाव के मद्देनजर जल्द से जल्द ये कार्य कराने की योजना बनाई गई है। उधर, दो फरवरी को स्वीकृत 110 करोड़ के विकास कार्यों को कराने के लिए टेंडर प्रक्रिया भी शुरू हो गई है।
150 करोड़ रुपये से पानी, सीवर समस्या भी दूर करने के प्रस्ताव तैयार
नगर निगम को 15वें वित्त आयोग से कूड़ा निस्तारण, पेयजल, सीवर आदि मदों में करीब 150 करोड़ रुपये आवंटित हुए हैं। इस धन के उपयोग के लिए नगर निगम, जलकल विभाग और जल निगम ने प्रस्ताव तैयार किए हैं। नगर निगम स्वास्थ्य विभाग ने आठ करोड़ रुपये से 100 कूड़ा गाड़ियां (हापर ट्रिपर), 15 करोड़ रुपये से 36 पोर्टेबल कांपेक्टर ट्रांसपर स्टेशन (विशेष कूड़ाघर) खरीदने के प्रस्ताव दिए हैं। फिलहाल नगर निगम में 450 हापर ट्रिपर हैं, जिनसे घरों से कूड़ा एकत्रित किया जाता है। पर, गाड़ियों की कमी की वजह से करीब 20 वार्डों में घरों से नियमित रूप से कूड़ा नहीं उठ पा रहा है।
स्वीकृति के लिए बैठक कल
इसके मद्देनजर घरों से कूड़ा उठाने वाली गाड़ियां खरीदने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इसी तरह भैरोघाट, जीटी रोड की द्वारिकापुरी ढाल, किदवईनगर संजय वन रोड पर सेवाश्रम के पास सहित 36 स्थानों में ऐसे कूड़ाघर बनवाए जाएंगे। यहां कूड़ा गाड़ी से आने वाला कूड़ा जमीन में एकत्रित करने के बजाय सीधे पोर्टेबल कांपेक्टर में एकत्रित होगा। इसके बाद उसे पनकी के ग्राम भऊ सिंह स्थित कूड़ा निस्तारण प्लांट भेज दिया जाएगा। इसी तरह प्रोजेक्ट सेल की तरफ से कूड़ा निस्तारण प्लांट में विभिन्न कार्यों के लिए प्रस्ताव तैयार किए गए हैं। जलकल विभाग और जल निगम वाले प्रस्ताव भी तैयार कर महापौर प्रमिला पांडेय की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में स्वीकृत कराने की कोशिश की जा रही है।
मुख्य पाइपलाइन को भी मिल सकती है स्वीकृति
जल निगम ने बैराज से शहर में फूलबाग स्थित इंटरमीडिएट पंपिंग स्टेशन और दक्षिणी क्षेत्र में गोशाला चौराहे तक 16 किलोमीटर लंबाई में बिछी घटिया मुख्य पाइपलाइन के स्थान पर लोहे की पाइपलाइन बिछाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इसे 15वें वित्त से स्वीकृति और धन आवंटन के लिए नगर निगम को दो महीने पहले प्रस्ताव दिया था, जिसे सैद्धांतिक सहमति मिलने के साथ ही तय हुआ कि इस कार्य के लिए जल निगम को किस्ताें में धन आवंटित किया जाएगा। पहली किस्त के रूप में 50 करोड़ दिए जाएंगे। बैठक में इस प्रस्ताव की स्वीकृति की भी संभावना जताई जा रही है।