बर्रा के जरौली फेज-1 निवासी राहुल कश्यप के पांच साल के बेटे अन्वित की रविवार शाम गले में टाॅफी चिपकने से मौत हो गई। अन्वित ने फ्रूटोला नाम की ये टॉफी घर के सामने स्थित किराना दुकान से खरीद कर खाई थी। टॉफी गले में फंसने के बाद जब उसे सांस लेने में दिक्कत हुई तो परिजन आनन-फानन अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
सोफा कारीगर राहुल कश्यप पिता ओमप्रकाश, मां मीरा, पत्नी सोनालिका, बेटी अनन्या और बेटे अन्वित के साथ जरौली में रहते थे। राहुल के मुताबिक रविवार शाम अन्वित ने उनसे टॉफी खाने के लिए जिद करके पैसे लिए और घर के सामने की किराना दुकान से फ्रूटोला नाम की टॉफी खरीद कर खा ली।
घर के सभी लोग कामकाज में व्यस्त थे। थोड़ी देर बाद अन्वित घर के अंदर आया और गला पकड़कर चिल्लाते-रोते हुए हाथ-पैर पटक रहा था। झटपटाहट की वजह पूछने पर जब वह कुछ बोल नहीं पाया और सांस लेने में तकलीफ होने लगी तो मां सोनालिका को लगा कि इसके गले में टॉफी अटकी है।
उन्होंने तुरंत पानी पिलाया तो अन्वित को राहत जरूर मिली लेकिन थोड़ी देर बाद फिर से सांस लेने में तकलीफ होने लगी। बच्चे की हालत बिगड़ती देख परिजन उसे पास के निजी अस्पताल लेकर गए। वहां डॉक्टर न होने पर दूसरे अस्पताल ले गए लेकिन तबतक उसकी सांसे थम चुकी थीं।
डॉक्टरों ने जांच के बाद बेटे को मृत घोषित कर दिया। सोमवार सुबह सूचना मिलने पर बर्रा पुलिस राहुल के घर गई और बेटे के शव का पोस्टमाॅर्टम कराने को कहा लेकिन परिजनों ने मना कर दिया। पुलिस का कहना है कि शिकायत मिलने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
सुबह भाई को किया रोचना, शाम को बिलखती रही अनन्या
रविवार सुबह भाई दूज होने के चलते हर बहन की तरह सात साल की अनन्या ने भी अन्वित को रोचना कर उसकी लंबी आयु की कामना की थी। उसे अंदेशा भी नहीं था कि रोजाना जिस तरह की टॉफियाें को दोनों भाई-बहन मिलकर खाते हैं। वही टॉफी उसकी भाई की मौत की वजह बन जाएगी। शाम को भाई की मौत के बाद वह बिलख-बिलखकर रोते हुए उसे पुकारती रही।
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन के प्रोफेसर डॉ. जेएस कुशवाहा ने बताया कि बच्चों के गले में कोई चीज फंस जाए तो सबसे पहले उसे उल्टा कर दें, और पीठ पर तेजी से थपथपाएं। ऐसा करने से हो सकता है कि गले में फंसी चीज अपने आप ही बाहर आ जाए। बिना देर किए नजदीकी अस्पताल ले जाएं और एंडोस्कोप से उस चीज को निकलवाने का प्रयास करें ताकि जान बचाई जा सके।
बालरोग अकादमी के सचिव व बालरोग विशेषज्ञ डॉ. अमितेश यादव ने बताया कि ऐसी स्थिति में परिजनों को घबराना नहीं चाहिए बल्कि तुरंत डॉक्टर के पास ले जाना चाहिए। कोशिश करें कि छोटे बच्चों को ऐसी कोई भी चीज न खाने दें जो उनके गले में फंस सकती है।