पत्रकार की हत्या के मामले में युवती व उसके दो भाइयों समेत चार को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। सबूत मिटाने में युवती की मां व चाचा को पांच-पांच साल की कैद भुगतनी होगी।
एक न्यूज चैनल के पत्रकार की नृशंस हत्या करने में चैनल की न्यूज रीडर व उसके दो भाइयों समेत चार दोषियों को अपर जिला जज 19 राकेश सिंह उम्रकैद और 9.50-9.50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। सबूत मिटाने की दोषी युवती की मां व चाचा को पांच-पांच साल कैद और दो-दो हजार रुपये जुर्माना भुगतना होगा। वहीं आम्र्स एक्ट के तहत दोषी पाए जाने पर एक दोषी को ढाई हजार रुपये अतिरिक्त जुर्माना देना होगा।
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बृजेश गुप्ता एक न्यूज चैनल के महानगर में ब्यूरो हेड थे। 14 जून 2009 को उनका शव उनकी ही कार में लावारिस हालत में रतनलाल नगर स्थित पानी की टंकी के पास मिला था। बृजेश के भाई प्रभात गुप्ता ने गोविंद नगर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें कहा था कि बृजेश 13 जून की शाम गौशाला मौरंग मंडी के पास अपनी कार से मिले थे। कार में न्यूज रीडर कनिका ग्रोवर, उसके भाई सन्नी, मन्नी व सुरजीत भी बैठे थे। प्रभात के पूछने पर कनिका और उसके भाइयों को घर छोडऩे के बाद घर आने की बात कही थी। देर रात तक बृजेश घर नहीं पहुंचे तो खोजबीन की गई लेकिन कोई जानकारी नहीं मिली। अगले दिन सुबह गोविंद नगर थाने गया तो पता चला कि सेट पर सूचना आ रही कि रतनलाल नगर पानी की टंकी के पास लावारिस गाड़ी खड़ी हुई है।
प्रभात पुलिस के साथ मौके पर पहुंचे और गाड़ी खोलकर देखी तो उसमे चादर में लिपटा बृजेश का शव मिला था। बृजेश के शरीर पर धारदार हथियार और गोली के कई निशान थे। बृजेश की लाइसेंसी रिवाल्वर व पांच सोने की अंगूठियां भी गायब थीं। विवेचना के बाद पुलिस ने रतनलाल नगर निवासी कनिका ग्रोवर, उसकी मां अल्का व दो भाई सन्नी व मन्नी ग्रोवर, गोविंद नगर की सेवाग्राम कालोनी निवासी सुरजीत सिंह उर्फ शंटी, गोविंद नगर निवासी बंटी उर्फ राजीव कुमार के खिलाफ चार्जशीट कोर्ट भेजी थी। अभियोजन की ओर से प्रभात व बृजेश के पहचान वाले और एक केबल ऑपरेटर समेत नौ गवाह कोर्ट में पेश किए। सबूतों और गवाहों के आधार पर कोर्ट ने हत्या के दोषी सुरजीत, सन्नी, मन्नी व कनिका को उम्रकैद और 9.50-9.50 हजार रुपये जुर्माने और सबूत मिटाने की दोषी अलका व बंटी को पांच-पांच साल कैद और दो-दो हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। आम्र्स एक्ट के तहत दोषी पाए जाने पर सुरजीत को ढाई हजार रुपये अतिरिक्त जुर्माना देना होगा।
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शोषण से तंग आकर बनाई थी हत्या की योजना
बृजेश गुप्ता एक न्यूज चैनल के ब्यूरो हेड थे और कनिका वहां न्यूज रीडर थी। दोनों में नजदीकी बढ़ी तो विवाह की बात चलने लगी लेकिन फिर दोनों में अलगाव हो गया और बृजेश ने कनिका को नौकरी से निकाल दिया। इसी बीच कनिका के पिता राजेंद्र को चरस तस्करी में जेल भेज दिया गया। कनिका और उसके घरवालों को लगा कि बृजेश ने ही पिता को जेल भिजवाया है, जिस पर बृजेश की हत्या का मन बना लिया था। डेढ़-दो माह पहले बृजेश ने कनिका को दोबारा नौकरी पर रख लिया था। कनिका ने बृजेश को अपने घर पर लाने और फिर उसकी हत्या के लिए सभी को कहा था। जिस पर सबने मिलकर बृजेश की हत्या की और फिर कनिका के घर से चादर में शव को लपेटकर गाड़ी में डालकर बाहर ले जाने की कोशिश की लेकिन पकड़े जाने के डर से पानी की टंकी के पास ही गाड़ी छोड़ दी थी। यह बातें पुलिस को दिए बयान में सुरजीत ने बताई थीं।
बृजेश को मिल रही थी धमकी, लिखाई थी रिपोर्ट
बृजेश ने प्रभात को बताया था कि उसे अज्ञात व्यक्ति ने फोन से धमकी दी है कि कनिका को छोड़ दो नहीं तो जान से मार देंगे। बृजेश ने किदवई नगर थाने में 29 जनवरी 2009 को रिपोर्ट भी दर्ज कराई थी।
लाइसेंसी रिवाल्वर व सोने की अंगूठी भी लूट ली
हत्या के बाद बृजेश की लाइसेंसी रिवाल्वर भी गायब थी। प्रभात ने बताया कि बृजेश आठ सोने की अंगूठियां पहनता था लेकिन शव से तीन ही मिली थीं, पांच अंगूठियां भी लूट ली गई थीं। बृजेश की रिवाल्वर सुरजीत के पास से बरामद हुई थी। मन्नी की निशानदेही पर रामलीला मैदान के पास लेबर कालोनी वाले नाले से हत्या में इस्तेमाल की गई हथौड़ी, सुम्मी व चाकू बरामद हुआ था।
मां, बेटी व भाइयों ने साफ किया था खून
बृजेश की हत्या के बाद मन्नी, सन्नी, कनिका व कनिका की मां अल्का ने गैलरी व दीवार में लगे खून और हथियारों पर लगे खून को साफ किया। गाड़ी को बाहर छोडऩे के लिए अभियुक्तों ने चाचा राजीव उर्फ बंटी को फोन कर बुलाया था जो गाड़ी चलाकर पानी की टंकी के पास कोने में छोडक़र चले गए। डर के कारण बाहर नहीं ले जा सके।
डरकर दोबारा कनिका को दी थी नौकरी
बृजेश के भाई प्रभात ने कोर्ट में दिए बयान में कहा था कि कनिका के पिता राजेंद्र ग्रोवर बर्रा से चोरी व चरस तस्करी में पकड़े गए थे। चकेरी में भी मुकदमा चला था। पिता के अपराधी प्रवृत्ति के होने की जानकारी मिलने पर बृजेश ने कनिका को निकाल दिया था। तब कनिका और उसके भाई धमकाने लगे थे। डरकर बृजेश ने कनिका को दोबारा रख लिया था।
दो स्वतंत्र गवाहों की गवाही बनी अहम
एक केबल ऑपरेटर ज्ञानचंद्र और बृजेश को जानने वाले अमरीश कुमार गुप्ता की गवाही भी कोर्ट में हुई थी। ज्ञानचंद्र ने बताया था कि घटना के दिन कनिका के घर के सामने बृजेश की कार को देखा था। चारों लोगों को आपस में बातचीत करते भी देखा था। अमरीश ने बताया था कि घटना के दिन बृजेश मिले तो पूछने पर बताया था कि कनिका को घर छोडऩे जा रहे हैं। मौत से पहले आखिरी बार तीन लोगों ने बृजेश को कनिका और उसके भाइयों के साथ देखा जिनकी गवाही अहम साबित हुई।