आईआईटी कानपुर का कैंपस इन दिनों सिर्फ रिसर्च और इनोवेशन के लिए ही नहीं बल्कि एक अनोखी ‘इंजीनियरिंग वाली शादी’ के लिए भी चर्चा में है। पिछले 32 वर्षों से हर साल होने वाली इस अनूठी शादी में अग्निकुंड और मंडप सजा, बरात निकली लेकिन वैदिक मंत्रों की जगह इंजीनियरिंग और तकनीक के फार्मूले पढ़कर फेरे लिए गए। शादी में छात्र ही दूल्हा, दुल्हन, पंडित, बराती सब बने। हॉल-1 से बरात निकलकर गाजे-बाजे के साथ पूरे कैंपस में घूमी। इस शादी का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
यह कोई असली विवाह नहीं बल्कि आईआईटी कानपुर की 32 साल पुरानी परंपरा का हिस्सा है। बीटेक अंतिम वर्ष के छात्र विदाई समारोह को हर साल यादगार अंदाज में निभाते हैं। मस्ती और उल्लास से भरी इस नकली शादी में होता सब कुछ असली ही है। कार्ड छापे जाते हैं, मेहंदी-हल्दी की रस्में होती हैं, बरात निकलती है और जमकर डांस भी होता है। इस साल दूल्हे की भूमिका में कुमार विशाल और दुल्हन की भूमिका में विदित परमार रहे।
विदित के साथ मेहंदी और हल्दी की रस्में हुईं। हाॅल-6 में संगीत कार्यक्रम के दौरान छात्राओं ने सहेलियों की भूमिका निभाई। इसके बाद हाॅल-1 से कुमार विशाल सेहरा बांधकर घोड़े पर सवार होकर बरात लेकर निकले। ढोल-नगाड़ों और बॉलीवुड गानों पर थिरकते छात्र-छात्राओं ने पूरे कैंपस को शादी के रंग में रंग दिया। द्वारचार से लेकर जयमाल तक की सभी रस्में पूरी की गईं। इस अनोखी परंपरा की शुरुआत वर्ष 1994 में हॉल-2 से हुई थी जो समय के साथ पूरे कैंपस की पहचान बन गई। आज यह सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं बल्कि आईआईटी के छात्रों के लिए पढ़ाई के दबाव के बीच यादों को संजोने और दोस्ती का जश्न मनाने का खास मौका बन चुका है।