छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के रानी लक्ष्मीबाई सभागार में शनिवार शाम शास्त्रीय संगीत की सुरमयी संध्या सजी। बनयान ट्री संस्था की ओर से आयोजित बरखा ऋतु कार्यक्रम में बांसुरी वादक पं. रोनू मजूमदार के मधुर सुरों और जसरंगी गायन की भावपूर्ण प्रस्तुति ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। आयोजन में विश्वविद्यालय के संगीत विभाग, स्वामी हरिदास संगीत एवं नाट्य अकादमी और स्मृति का सहयोग रहा। शुभारंभ कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक और विधायक महेश त्रिवेदी सहित अतिथियों ने दीप जलाकर किया।
कुलपति ने कहा कि भारतीय संगीत की समृद्ध परंपरा को संरक्षित कर आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी युवा पीढ़ी की है। कार्यक्रम संयोजक डॉ. राजेंद्र कुमार मिश्रा ने शास्त्रीय संगीत के प्रचार-प्रसार में स्मृति के योगदान को रेखांकित किया। संगीत संध्या की पहली प्रस्तुति डॉ. अविनाश कुमार और डॉ. रिंदाना रहस्य के जसरंगी गायन की रही। डॉ. रिंदाना ने राग मेघ और डॉ. अविनाश ने राग दुर्गा प्रस्तुत किया। दोनों कलाकारों ने अलग-अलग रागों के समन्वय से जसरंगी शैली की विशिष्टता दिखाई। डॉ. अविनाश ने बताया कि इस गायन पद्धति को पं. जसराज ने स्थापित किया था। इसके बाद पं. रोनू मजूमदार ने बांसुरी के मधुर स्वरों और शानदार लयकारी से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। अंत में कलाकारों को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर डॉ. वंदना पाठक, प्रो. रश्मि गोरे और विनीत मिश्रा समेत कई लोग मौजूद रहे।