बेला-कानपुर रोड पर घरों में भरा बारिश का पानी
- फोटो : amar ujala
किराये की खेती में 60 हजार की लागत से भिंडी, लौकी, तरोई, बींस बोई थी। सब गंगा मैया की भेंट चढ़ गया है। खेतों में इतना पानी भरा है कि करीब तीन महीने तक कोई फसल नहीं बो सकते हैं। परिवार के बच्चों को अब जीवनयापन के लिए मजदूरी करने जाना पड़ेगा। -भगवानदीन निषाद, लक्ष्मनपुरवा
बाढ़ से कानपुर का कटरी क्षेत्र जलमग्न
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रिश्तदारों से उधार पैसे लेकर एक बीघा में गेंदा, एक बीघा में भिंडी, एक बीघा में मूली लगाई थी। बाढ़ के पानी ने सब बर्बाद कर दिया। करीब 70 हजार की लागत पानी में बह गई। अब परिवार का पालन पोषण करने के लिएशहर जाकर मजदूरी करनी पड़ेगी। इतनी बार बाढ़ से फसल बर्बाद हुई आज तक एक पैसा मुआवजे के नाम पर नहीं मिला। -बाबूराम निषाद, भोपालपुरवा
बाढ़ से कानपुर का कटरी क्षेत्र जलमग्न
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और घटा गंगा का पानी
हरिद्वार और नरौरा से कम पानी आने के कारण शनिवार को गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु से नीचे आ गया। गंगा बैराज के गेज रीडर उत्तम पाल ने बताया कि बैराज की अपस्ट्रीम में जलस्तर 114.40 मीटर पर आ गया है। बैराज के आगे डाउन स्ट्रीम में यह 113.90 मीटर रहा। नरौरा से 71,077 क्यूसेक और हरिद्वार से 92,098 क्यूसेक पानी आया। बैराज से 3,81,582 क्यूसेक पानी निकाला गया। इसके चलते शुक्लागंज में गंगा का जलस्तर शुक्रवार के 113.06 मीटर से 32 सेंटीमीटर घटकर 112.74 मीटर रहा। यहां चेतावनी बिंदु 113 मीटर पर है।
बाढ़ से कानपुर का कटरी क्षेत्र जलमग्न
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अभी गांवों में भरा पानी
गांवों में पानी भरा होने के कारण ग्रामीण घरों को वापस नहीं जा सकते हैं। बाढ़ की वजह से बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। शनिवार को मेडिकल कैंपों में करीब 700 ग्रामीणों ने दवाइयां लीं। बिठूर विधायक अभिजीत सिंह सांगा, पूर्व विधायक मुनींद्र शुक्ला, ब्लॉक प्रमुख अनुराधा शुक्ला, अशोक निषाद, मल्हू निषाद, अमित यादव ने बैराज मार्ग पर शरण लिए करीब छह हजार लोगों के लिए भोजन उपलब्ध करवाया। बैराज मार्ग पर शरण लिए दुर्गापुरवा निवासी विवान निषाद (10) को बाइक सवार ने टक्कर मार दी जिससे उसे सिर के अलावा कई जगह चोटें आईं। मेडिकल कैम्प में दवा तो मिल गई लेकिन ड्रेसिंग न हो पाई।
बाढ़ से कानपुर का कटरी क्षेत्र जलमग्न
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भावी प्रत्याशी आपदा में तलाश रहे अवसर
ख्योरा कटरी और बिठूर कटरी के सभी गांव कल्याणपुर जिला पंचायत के तहत आते हैं। अगले साल जिला पंचायत सदस्य के अलावा प्रधानी के चुनाव भी प्रस्तावित हैं। भावी उम्मीदवार बाढ़ की आपदा में तन, मन और धन से बाढ़ पीड़ितों को लुभाने के लिए सेवा कर रहे हैं। कुछ ने तो बाढ़ राहत शिविरों में लगे बैनरों में अपनी दावेदारी भी कर रखी है।