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इस ऑपरेशन का नेतृत्व कर रहे इंस्पेक्टर अभय सिंह ने बताया कि आसिफ एक कूरियर कंपनी में पार्सल देकर चला गया। इसके बाद पुलिस कूरियर बुकिंग दफ्तर पहुंची। वहां के कर्मचारी से दिए गए पार्सल के बारे में पूछा। पहले उसने बताने में आनाकानी की, लेकिन थोड़ी सख्ती करते ही उसने पार्सल पुलिस को सौंप दिया। पार्सल देखने में हूबहू हैदराबाद में मनीष के पास से, गाजियाबाद में राघव के पास से और किदवईनगर में शैलेंद्र के पास मिले पार्सल जैसा ही था। इस पर भेजने और पाने वाले का नाम कोड में लिखा था। जिसे पार्सल देना है उसके कोड नेम संग मोबाइल नंबर लिखा मिला।
जियाउल हसन समेत चारों को गिरफ्तार कर लिया
पुलिस ने पार्सल खोला तो उसमें भारी संख्या में यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की फर्जी मार्कशीट और प्रमाणपत्र मिले। सभी पड़ोसी जिले के इंटर काॅलेज के नाम पर छापे गए थे। अधिकतर में 65 से 85 प्रतिशत अंक भी थे। गिरोह के सदस्यों को शक न हो इसके लिए हूबहू संदिग्ध पार्सल जैसा दूसरा पार्सल तैयार कर उसमें सादे कागज भरकर उसे दिल्ली में उसी पते पर कूरियर कर दिया गया। इधर पुलिस ने कूरियर के दिल्ली पहुंचने से पहले ही कार्रवाई करते हुए बेकनगंज में जियाउल हसन समेत चारों को गिरफ्तार कर लिया। वहीं, पुलिस की एक टीम दिल्ली में भी सक्रिय कर दी गई है।
बेकनगंज के युवक ही हैं कनाडा में एजेंट
पुलिस ने बताया कि बेकनगंज इलाके के रहने वाले भावीन, वारी और असलम कनाडा में फर्जी मार्कशीट गिरोह के लिए बताैर एजेंट काम कर रहे थे। कनाडा और ब्रिटेन में कॉमर्स सेक्टर के लोगों की मांग ज्यादा है। इसके चलते बीकॉम आदि की मार्कशीट की वहां से मांग ज्यादा आती है। बीकॉम वाले लोगों को वहां जल्दी और अच्छी सैलरी वाली नौकरी मिल जाती है। ऐसे में एजेंट वहां से मांग बताते और यहां से मार्कशीट व डिग्री बनाकर ऑनलाइन भेज दी जाती है। स्कैनर के माध्यम से भुगतान होता था। मार्कशीट और डिग्री प्रिंट करने के लिए दिल्ली के सदर बाजार से खास कागज मंगाया जाता था। यह आसानी से बाजारों में उपलब्ध नहीं है।