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Kanpur: ईएमओ और सहयोग करने वाले 10 कर्मियों से स्पष्टीकरण तलब, 35 दिन तक भर्ती रही थी महिला बंदी, कमेटी गठित

Sat, 08 Aug 2026 11:55 AM IST
Himanshu Awasthi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur News: उर्सला अस्पताल में पेट दर्द के बहाने पिछले 35 दिनों से प्राइवेट कमरे में भर्ती महिला बंदी अनुजा अवस्थी की जांच रिपोर्ट सामान्य आने के बाद बड़ा खुलासा हुआ है। बिना सूचना दिए बंदी को भर्ती रखने के मामले में अस्पताल की निदेशक ने ईएमओ डॉ. सपन गुप्ता और सहयोग करने वाले 10 कर्मियों से स्पष्टीकरण तलब करते हुए जांच कमेटी गठित कर दी है।
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उर्सला अस्पताल - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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कानपुर के उर्सला में ईएमओ के अंडर में 35 दिन से भर्ती महिला बंदी का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। महिला की जांच रिपोर्ट में सब कुछ सामान्य निकलने पर निदेशक ने ईएमओ से स्पष्टीकरण मांगा है। मामले की जांच के लिए कमेटी बनाई है। ईएमओ का सहयोग करने वाले 10 अस्पताल कर्मियों से स्पष्टीकरण मांगा गया है।

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दो जुलाई में महिला बंदी अनुजा अवस्थी को पेट में तेज दर्द की शिकायत पर कारागार चिकित्साधिकारी के परामर्श पर उर्सला लाया गया था। अस्पताल के ईएमओ डॉ. सपन गुप्ता ने महिला बंदी को भर्ती कर लिया है। उसे प्राइवेट कमरा नंबर 207 में भर्ती करके खुद ही इलाज शुरू कर दिया।

उसकी जांचें कराई गईं, तो सब कुछ सामान्य निकला
बंदी के भर्ती होने के बारे में उन्होंने निदेशक व प्रबंधन को कुछ नहीं बताया। चार अगस्त को जब जेल से रोगी की जानकारी के लिए चिट्ठी आई तो निदेशक और सीएमएस को पता चला। सीएमएस को तब तक यह नहीं पता था कि बंदी किसी ईएमओ के अंडर में भर्ती है। चार अगस्त को ही उसकी जांचें कराई गईं, तो सब कुछ सामान्य निकला।

ईएमओ के अलावा 10 और स्टॉफ से भी स्पष्टीकरण मांगा
सवाल यह उठ रहा है कि सब कुछ सामान्य होने के बाद भी उसे भर्ती क्यों रखा गया। निदेशक डॉ. सीमा श्रीवास्तव ने कहा है कि ईएमओ पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने सूचना न देकर बड़ी लापरवाही की है। शुक्रवार को स्पष्टीकरण मांगा गया है और कमेटी बनाकर जांच भी की जाएगी। ईएमओ के अलावा 10 और स्टॉफ से भी स्पष्टीकरण मांगा गया है, क्योंकि उन्होंने ईएमओ का सहयोग किया था।

ये भी उठ रहे सवाल
  • पेट दर्द में 35 दिन तक क्यों भर्ती किया गया।
  • अगर कोई गंभीर समस्या थी तो विशेषज्ञ को भी क्यों नहीं बुलाया गया।
  • महिला को जेल से आराम दिलाने के उद्देश्य से ऐसा तो नहीं किया गया।
  • जेल अधीक्षक ने भी इतने दिनों तक रोगी की सुध क्यों नहीं ली।

महिला बंदी के खिलाफ अनवरगंज थाने में है मामला दर्ज
विचाराधीन महिला बंदी अनुजा अवस्थी पर एससी-एसटी एक्ट के तहत अनवरगंज थाने में मामला दर्ज है। इसके अलावा उस पर धारा 420, 427, 467, 468, 471, 504, 506 के तहत आरोपी बनाया गया है। अखिलेश दुबे के मामले में भी ईएमओ पर आरोप लगे थे।

अब डॉक्टर दोबारा नहीं चाहते हैं कि आरोप लगें
अस्पताल के सूत्रों के मुताबिक डॉक्टर ने इसके लिए पैसे लिए हैं और वह अपने इस खेल में दूसरे डॉक्टरों को भी जोड़ना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने एक फिजीशियन से भी बातचीत की थी लेकिन उन्होंने मना कर दिया। सभी डॉक्टरों को डर था कि अखिलेश दुबे को भर्ती करने के मामले में उन पर आरोप लग चुके हैं। अब डॉक्टर दोबारा नहीं चाहते हैं कि आरोप लगें।

अगर किसी रोगी की मौत हो रही होगी तो क्या उसे ऐसे ही छोड़ दिया जाएगा। महिला बंदी तेज दर्द के साथ आई थी। ऐसे में उसे भर्ती करना पड़ा था। इसकी जानकारी मैंने बाकी स्टाफ को दे दी थी कि वहां से सूचना चली जाएगी लेकिन नहीं गई।  -डॉ. सपन गुप्ता, ईएमओ
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पेट दर्द की शिकायत में उर्सला में भर्ती कराया गया था। स्वास्थ्य सही होने की जानकारी पर उसे वापस बुला लिया गया। ऐसे में हम पर आरोप लगाने का कोई मतलब नहीं है।  -राजेश पांडेय, जेल अधीक्षक, कानपुर
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