नेशनल नियोनेटल फोरम (एनएनफ) के बैनर तले आयोजित कार्यशाला का रविवार को समापन हो गया। अंतिम दिन वरिष्ठ बालरोग विशेषज्ञों ने पैनल डिस्कशन में सलाह दी कि प्री मैच्योर नवजात को ऑक्सीजन देने में सतर्कता बरती जाए। जरूरत से ज्यादा ऑक्सीजन देने से नवजात की आंखों को नुकसान होता है। इससे स्थायी रूप से अंधत्व हो सकता है।
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला ने बताया कि बालरोग और नेत्र रोग विभाग के बीच समन्वय बैठाएंगे। इससे नेत्र रोग विशेषज्ञों नवजात बच्चों की आंखों को चेक करेंगे। अगर कोई दिक्कत होगी तो तुरंत इलाज शुरू हो जाएगा। नियोनेटल वेंटिलेशन कार्यशाला का आयोजन मल्टी सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में किया गया। पैनल डिस्कशन में देहरादून के डॉ. अशोक देवरारी, हैदराबाद के डॉ. श्रीनिवास मुरकी आदि मौजूद रहे। विशेषज्ञों ने कहा कि एंटी बाॅयोटिक का इस्तेमाल कम से कम किया जाए। ऑक्सीजन का ओवर यूज बच्चों की रेटिना पर बुरा असर डालता है। इससे खून की नलियां फूलती हैं और आंख का पर्दा खराब हो सकता है। इस मौके पर डॉ. यशवंत राव, डॉ. अमितेश यादव डॉ. अंबरीश गुप्ता आदि मौजूद रहे।