सार
Kanpur News: जाजमऊ समेत आठ हॉटस्पॉट इलाकों में क्रोमियम और अन्य विषैली भारी धातुओं का स्तर मानक से कई गुना अधिक पाया गया है, जिससे वहां का भूजल पीने योग्य नहीं रह गया है। जिला प्रशासन द्वारा तीन अक्टूबर को एनजीटी में दाखिल आईआईटी कानपुर की प्राथमिक जांच रिपोर्ट में यह सनसनीखेज खुलासा हुआ है।
पुरवामीर में दीवारों में क्रोमियम युक्त कचरे का असर
- फोटो : amar ujala
कानपुर जिले में जाजमऊ समेत आठ हाॅटस्पाॅट में क्रोमियम सहित अन्य भारी धातुएं मानक से कई गुना ज्यादा हैं। क्रोमियम की वजह से पानी पीने के योग्य नहीं रह गया है। यह खुलासा आईआईटी की शुरूआती जांच रिपोर्ट में हुआ है। यह रिपोर्ट प्रशासन ने तीन अक्तूबर को राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में जमा की है।
इसी तरह कानपुर देहात और फतेहपुर जिले में हो रही जांच की शुरुआती रिपोर्ट भी एनजीटी को सौंपी गई है। यह वैज्ञानिक जांच नवंबर तक पूरी होने के आसार हैं। जाजमऊ औद्योगिक क्षेत्र के अलावा जूही बंबुरहिया, अफीम कोठी, तेजाब मिल कैंपस, गोलाघाट, पनकी औद्योगिक क्षेत्र, नौरेया खेड़ा-नौबस्ता और रूमा टीएसडीएफ को जांच के दायरे में रखा गया है।
पुरवामीर में दीवारों में क्रोमियम युक्त कचरे का असर
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जुलाई-अगस्त में 121 नमूने लिए गए
आईआईटी की रिपोर्ट के अनुसार इन स्थानों पर जुलाई-अगस्त में 121 नमूने लिए गए। कानपुर देहात के जिलाधिकारी की ओर से दाखिल अनुपालन हलफनामे में बताया गया था कि रनियां क्षेत्र के खानचंद्रपुर गांव में क्रोमियम कचरे को टीएसडीएफ में निस्तारित किया जा चुका है। कचरा हटाने के बाद मिट्टी में प्रदूषण का आकलन कर साफ मिट्टी डालने और पौधरोपण कराने की बात भी कही गई थी।
क्रोमियम कचरा
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जून 2026 में हुआ था एमओयू
अब आईआईटी कानपुर इसी तरह तीनों जिलों कानपुर नगर, कानपुर देहात और फतेहपुर में प्रदूषण के वैज्ञानिक आकलन और मैपिंग का काम कर रहा है। इसके लिए तीनों जिलों के प्रशासन और आईआईटी के बीच जून 2026 में एमओयू हुआ था।
रनियां खानचंद्र मटियामऊ मार्ग पर डंप क्रोमियम
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नवंबर से तकनीकी सिफारिशें तैयार करने की योजना
डीएम की ओर से एनजीटी को दी गई जानकारी के मुताबिक जुलाई से सितंबर के बीच विभिन्न हॉटस्पॉट में सैंपलिंग हो चुकी है। अन्य स्थानों पर नमूने लिए जाने हैं। अक्तूबर से हवा की गुणवत्ता की जांच, इसके बाद जीआईएस आधारित मैपिंग और नवंबर से तकनीकी सिफारिशें तैयार करने की योजना है।