हरि ओम तत्सत का होता है जाप
प्रतिमा के दाईं ओर गणेश जी और बाईं ओर गायत्री माता विराजमान हैं। वर्ष 1972 में दुर्गा मंदिर सेवा समिति का गठन हुआ। गणेश शंकर बाजपेयी इसके प्रथम अध्यक्ष बने। मंदिर में प्रतिदिन सुबह पांच बजे हवन और आरती होती है। नवरात्र में दुर्गा सप्तशती का पाठ किया जाता है। प्रत्येक शनिवार की शाम आरती के बाद रात से लेकर सुबह तक यहां हरि ओम तत्सत का जाप होता है।
साड़ी और सुहाग का चढ़ाते हैं सामान
गुरुजी पांच सितंबर 1983 को ब्रह्मलीन हो गए। स्थानीय लोगों के अनुसार पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी 1978 में चुनाव प्रचार के दौरान मां के दर्शन करने आई थीं। इसके बाद वर्ष 1980 में वह दोबारा प्रधानमंत्री बनीं। मन्नत पूरी होने पर यहां श्रद्धालु मां को साड़ी और सुहाग का सामान चढ़ाते हैं, जिसे करवा चौथ से पहले सुहागिन महिलाओं में वितरित किया जाता है।
भक्त ही करते हैं मंदिर की सेवा
मंदिर समिति के अध्यक्ष आदित्य सिंह ने बताया कि मंदिर के निर्माण में केवल राजमिस्त्री लगाया गया था जबकि बाकी काम भक्तों ने श्रमदान से किया। आज भी यही परंपरा जारी है। केवल मुख्य पुजारी आचार्य विनोद पांडेय को वेतन दिया जाता है। अन्य सभी भक्त श्रद्धाभाव से सेवा करते हैं। मंदिर में हर व्यक्ति सेवादार है। मंदिर के पीछे गुरुजी की प्रतिमा भी स्थापित है।