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Kanpur: खुदी सड़कें…उड़ती धूल और ट्रैफिक जाम, घरों में पसरा जुकाम-बुखार, पीएम की चपेट में आने के ये हैं लक्षण

Sat, 25 Oct 2025 11:22 AM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur News: कानपुर में पीएम 2.5 का स्तर सुरक्षित सीमा से पांच गुना बढ़कर 141 पहुंचने से हवा जहरीली हो गई है, जिसके कारण घरों में जुकाम, बुखार और सांस के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है। चिकित्सकों ने मास्क लगाने, गरारे करने और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने की सख्त सलाह दी है।
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कंपनीबाग चौराहे से रावतपुर तिराहे जाने वाली रोड पर उड़ती धूल निकलते लोग 2 - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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कानपुर में घर-घर जुकाम, बुखार, खांसी के मरीजों की संख्या में इजाफा दिख रहा है। सरकारी अस्पतालों और निजी क्लीनिकों पर सर्दी-बुखार के साथ सांस की बीमारी वाले मरीजों की लाइनें लग रही हैं। इसकी मुख्य वजह शहर में बढ़ा वायु प्रदूषण है। शुक्रवार को शहर की हवा में पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) 2.5 की मात्रा सुरक्षित स्तर 30 से करीब पांच गुना बढ़कर 141 तक पहुंच गई। इसी तरह पीएम 10 की मात्रा भी सुरक्षित स्तर 50 से तीन गुना से अधिक बढ़कर 170 तक पहुंच गई है। हवा में घुले धूल-धुएं और गंदगी के यह महीन कण बीमारियों की बड़ी वजह बन रहे हैं।

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चिकित्सकों के मुताबिक वर्तमान में बिना मास्क लगाए घर से बाहर निकलना बीमारियों को न्योता देने के जैसा है। आरोग्यधाम की वरिष्ठ होमियोपैथिक चिकित्सक डॉ. आरती मोहन ने कहा कि इस समय शहर में धुंध छाई हुई है। सुबह शाम टहलने से बचें। घर से बिना मास्क लगाए न निकलें। यदि घर के पास निर्माण गतिविधियां चल रही हैं, धूल है तो पानी का छिड़काव करें। सबसे जरूरी है कि अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाएं।
नियमित अंतराल में पानी पीते रहें और विटामिन सी का सेवन करें।

कंपनीबाग चौराहे से रावतपुर तिराहे जाने वाली रोड पर उड़ती धूल निकलते लोग 2 - फोटो : amar ujala
आंखों को रगड़ने के बजाय साफ पानी से साफ करें
इस प्रदूषित माहौल में भी कई लोग बीमारियों से बचे हैं, तो इसकी वजह बेहतर रोग प्रतिरोधक क्षमता ही है। यदि कोई बीमार है, तो उसे ठंडी चीजों से परहेज करना चाहिए। अचानक गर्म से ठंडे या ठंड से गर्म माहौल में आने से बचें। नियमित दवाओं का सेवन करें। हैलट के आई बैंक की निदेशक डॉ. शालिनी मोहन ने कहा कि पीएम मैटर की इतनी अधिक मात्रा से धूल-मिट्टी के कण आंखों में जाते हैं। बाहर निकलते समय आंखों पर अल्ट्रावायलेट प्रोटेक्शन वाला चश्मा लगाएं। आंखों को रगड़ने के बजाय साफ पानी से साफ करें। यदि सिगरेट पीते हैं तो इससे दूरी बनाएं। यदि कोई पास में सिगरेट पी रहा है, तो उससे दूरी बनाएं।

कंपनीबाग चौराहे से रावतपुर तिराहे जाने वाली रोड पर उड़ती धूल में निकलते वाहन - फोटो : amar ujala
अपने मन से कोई दवा न लें
लालिमा होने पर आंखों में लुबि्रकेंट वाला आईड्रॉप डाल सकते हैं। तकलीफ बढ़ जाए तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। मुरारीलाल चेस्ट हॉस्पिटल के प्रोफेसर व विभागाध्यक्ष डॉ. अवधेश कुमार ने कहा कि वायु प्रदूषण की इस स्थिति में बाहर से घर आने पर गर्म पानी से गरारे जरूर करें। सुबह उठकर गुनगुने पानी में एक चुटकी नमक डालकर गरारे करने से सांस की कई बीमारियों से बचाव हो जाएगा। बाहर निकलते समय बाइक से हैं, तो मास्क के साथ हेलमेट और कार से होने पर शीशे बंद रखें। यदि वायरल जैसे लक्षण ठीक न हों तो डॉक्टर को दिखाएं अपने मन से कोई दवा न लें।

सड़क पर उड़ती धूल और धूआं छोड़ता ट्रक - फोटो : amar ujala
जानें पीएम कणों के बारे में
हवा में तैरते ठोस कणों और तरल बूंदों के संयोजन से पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) बनता है। इसमें धूल, कालिख, गंदगी भी होती है। पीएम 2.5 ढाई माइक्रोमीटर और पीएम-10, 10 माइक्रोमीटर व्यास वाले बेहद सूक्ष्म कण हैं और यह फेफड़ों में सांस के जरिए गहराई तक प्रवेश कर सकते हैं। इन कणों में भारी धातु आयन (कैडमियम, निकेल, पोटेशियम, कॉपर), कार्बनिक और अकार्बनिक यौगिक, एलर्जिक, माइक्रोबियल यौगिक और पॉलीसाइक्लिक एरोमैटिक हाइड्रोकार्बन (पीएएच) भी शामिल हैं। इससे श्वसन तंत्र से जुड़ी बीमारियां हो सकती हैं।

उड़ती धूल से परेशान लोग - फोटो : अमर उजाला
पीएम की चपेट में आने के प्रमुख लक्षण
थकान, आंखों में लालिमा, खुजली और असहजता, सिर दर्द, खांसी, जुकाम, सांस लेने में परेशानी, छाती में जकड़न, अस्थमा के लक्षण बढ़ना और स्थिति बिगड़ना। पीएम के संपर्क में आने से रोगियों, बुजुर्गों और बच्चों की स्थिति और बिगड़ सकती है। यह निमोनिया और ब्रोंकाइटिस का भी कारण बनता है।

उड़ती धूल से परेशान लोग - फोटो : अमर उजाला
पीएम बढ़ने के मुख्य कारण
पराली पराली जलाने से पीएम की सघनता बढ़ जाती है जो फेफड़ों के अंदर गहराई तक प्रवेश कर सकती है। इससे फेफड़ों के कैंसर की संभावना 36 फीसदी तक बढ़ जाती है। वाहनों, उद्योगों से निकलने वाला धुआं, कचरा जलाना, खोदाई, निर्माण कार्य, पटाखे जलाना
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औद्योगिक क्षेत्र में उड़ती धूल - फोटो : amar ujala

आप कर सकते हैं योगदान

  • जब प्रदूषण कम करने की बात आती है तो प्रत्येक योगदान मायने रखता है। ऐसे कुछ उपाय हैं, जिन्हें अपनाकर पीएम के प्रदूषण को कम किया जा सकता है।
  • यदि आप धूम्रपान करते हैं, तो इसे छोड़ दें क्योंकि यह पीएम 2.5 को बढ़ाता है।
  • लकड़ी, मोमबत्तियां और चिमनियों को लगातार जलाने से बचें।
  • सार्वजनिक वाहन का इस्तेमाल करें।
  • घरों में सौर ऊर्जा जैसे नवीकरणीय और स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों को बढ़ाएं।
  • घरों में जेनरेटर का प्रयोग न करें।
  • लाल बत्ती पर प्रतीक्षा करने पर वाहनों को बंद कर दें।
  • घरों में अनावश्यक मरम्मत व निर्माण कराना बंद करें।
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