कंपनीबाग चौराहे से रावतपुर तिराहे जाने वाली रोड पर उड़ती धूल निकलते लोग 2
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आंखों को रगड़ने के बजाय साफ पानी से साफ करें
इस प्रदूषित माहौल में भी कई लोग बीमारियों से बचे हैं, तो इसकी वजह बेहतर रोग प्रतिरोधक क्षमता ही है। यदि कोई बीमार है, तो उसे ठंडी चीजों से परहेज करना चाहिए। अचानक गर्म से ठंडे या ठंड से गर्म माहौल में आने से बचें। नियमित दवाओं का सेवन करें। हैलट के आई बैंक की निदेशक डॉ. शालिनी मोहन ने कहा कि पीएम मैटर की इतनी अधिक मात्रा से धूल-मिट्टी के कण आंखों में जाते हैं। बाहर निकलते समय आंखों पर अल्ट्रावायलेट प्रोटेक्शन वाला चश्मा लगाएं। आंखों को रगड़ने के बजाय साफ पानी से साफ करें। यदि सिगरेट पीते हैं तो इससे दूरी बनाएं। यदि कोई पास में सिगरेट पी रहा है, तो उससे दूरी बनाएं।
कंपनीबाग चौराहे से रावतपुर तिराहे जाने वाली रोड पर उड़ती धूल में निकलते वाहन
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अपने मन से कोई दवा न लें
लालिमा होने पर आंखों में लुबि्रकेंट वाला आईड्रॉप डाल सकते हैं। तकलीफ बढ़ जाए तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। मुरारीलाल चेस्ट हॉस्पिटल के प्रोफेसर व विभागाध्यक्ष डॉ. अवधेश कुमार ने कहा कि वायु प्रदूषण की इस स्थिति में बाहर से घर आने पर गर्म पानी से गरारे जरूर करें। सुबह उठकर गुनगुने पानी में एक चुटकी नमक डालकर गरारे करने से सांस की कई बीमारियों से बचाव हो जाएगा। बाहर निकलते समय बाइक से हैं, तो मास्क के साथ हेलमेट और कार से होने पर शीशे बंद रखें। यदि वायरल जैसे लक्षण ठीक न हों तो डॉक्टर को दिखाएं अपने मन से कोई दवा न लें।
सड़क पर उड़ती धूल और धूआं छोड़ता ट्रक
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जानें पीएम कणों के बारे में
हवा में तैरते ठोस कणों और तरल बूंदों के संयोजन से पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) बनता है। इसमें धूल, कालिख, गंदगी भी होती है। पीएम 2.5 ढाई माइक्रोमीटर और पीएम-10, 10 माइक्रोमीटर व्यास वाले बेहद सूक्ष्म कण हैं और यह फेफड़ों में सांस के जरिए गहराई तक प्रवेश कर सकते हैं। इन कणों में भारी धातु आयन (कैडमियम, निकेल, पोटेशियम, कॉपर), कार्बनिक और अकार्बनिक यौगिक, एलर्जिक, माइक्रोबियल यौगिक और पॉलीसाइक्लिक एरोमैटिक हाइड्रोकार्बन (पीएएच) भी शामिल हैं। इससे श्वसन तंत्र से जुड़ी बीमारियां हो सकती हैं।
उड़ती धूल से परेशान लोग
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पीएम की चपेट में आने के प्रमुख लक्षण
थकान, आंखों में लालिमा, खुजली और असहजता, सिर दर्द, खांसी, जुकाम, सांस लेने में परेशानी, छाती में जकड़न, अस्थमा के लक्षण बढ़ना और स्थिति बिगड़ना। पीएम के संपर्क में आने से रोगियों, बुजुर्गों और बच्चों की स्थिति और बिगड़ सकती है। यह निमोनिया और ब्रोंकाइटिस का भी कारण बनता है।
उड़ती धूल से परेशान लोग
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पीएम बढ़ने के मुख्य कारण
पराली पराली जलाने से पीएम की सघनता बढ़ जाती है जो फेफड़ों के अंदर गहराई तक प्रवेश कर सकती है। इससे फेफड़ों के कैंसर की संभावना 36 फीसदी तक बढ़ जाती है। वाहनों, उद्योगों से निकलने वाला धुआं, कचरा जलाना, खोदाई, निर्माण कार्य, पटाखे जलाना
औद्योगिक क्षेत्र में उड़ती धूल
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