'अकेले मैं नहीं, पूरी कमेटी तय करती है पात्रता'
फरवरी 2024 के शासनादेश (केवल 100 बेड वाले अस्पतालों को पात्रता) का उल्लंघन कर छोटे अस्पतालों को योजना का लाभ देने के आरोप पर डॉ. सुधाकर ने कहा कि किसी भी अस्पताल के आवेदन को स्वीकृत या निरस्त करने का अधिकार अकेले उनका नहीं होता। यह फैसला एक पूरी कमेटी द्वारा लिया जाता है। उनके इस लिखित बयान के बाद अब कमेटी में शामिल अन्य अधिकारियों से भी पूछताछ करने की तैयारी की जा रही है।
सरकारी आवास और घूस के आरोपों को बताया बेबुनियाद
संविदा कर्मचारी होने के बावजूद सीएमओ परिसर स्थित सरकारी आवास में रहने के आरोप पर उन्होंने कहा कि उनके नाम से कोई कमरा अलॉट नहीं है और अवैध कब्जे का आरोप पूरी तरह गलत है।
हालांकि, वहां रह रहे ड्राइवर से पूछताछ में सामने आया कि पहले आवास एक सुपरवाइजर के नाम था, लेकिन डॉ. सुधाकर ही वहां रह रहे थे। इसके अलावा वर्ष 2023 में सोने की चेन मांगने के आरोप को भी उन्होंने निराधार बताया। उन्होंने जानकारी दी कि इससे पहले भी उनके खिलाफ तीन जांच कमेटियां बनीं, लेकिन कोई भी आरोप सिद्ध नहीं हुआ।
अगले सप्ताह सीएमओ को सौंपी जाएगी रिपोर्ट
जांच समिति के अधिकारियों का कहना है कि डॉ. सुधाकर के जवाब बेहद घुमावदार हैं। अब शिकायतकर्ताओं और संबंधित अस्पतालों के प्रबंधकों के विस्तृत बयान दर्ज किए जाएंगे। सभी तथ्यों, दस्तावेजों और बयानों का विश्लेषण करने के बाद समिति अगले सप्ताह अपनी अंतिम जांच रिपोर्ट सीएमओ को सौंपेगी। वहीं, डॉ. सुधाकर का कहना है कि उनके खिलाफ रची गई पूरी साजिश और लगाए गए सभी आरोप पूरी तरह बेबुनियाद हैं।