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Kanpur: डीएम निर्देश देते गए सीएमओ ने नहीं किया अमल, यहीं सी बिगड़ी बात…इसलिए शुरू हुई राजनीतिक खेमेबाजी

Tue, 17 Jun 2025 04:51 PM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur News: डीएम ने प्रमुख सचिव को लिखे पत्र में कहा कि यह सभी मामले गंभीर हैं। इनको संज्ञान में लेकर कार्रवाई करें। डीएम का संस्तुति पत्र जाने के बाद इधर सीएमओ अपने बचाव में उतर आए। बताया जा रहा है कि उन्होंने इसके लिए जनप्रतिनिधियों से मुलाकात कर अपने लिए डिप्टी सीएम चिकित्सा स्वास्थ्य को पत्र लिखने का आग्रह किया।
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जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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कानपुर में जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह और मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. हरिदत्त नेमी के बीच चल रहे मामले बढ़ने की वजह डीएम की ओर से स्वास्थ्य विभाग की अनियमितताओं को ठीक करने के लिए लगातार किया गया निरीक्षण है। इसे ठीक करने के लिए डीएम के निर्देश को सीएमओ ने गंभीरता से नहीं लिया। इसी को आधार बनाकर डीएम ने सीएमओ को हटाने की संस्तुति का पत्र प्रमुख सचिव स्वास्थ्य को लिखा। तभी बात बढ़ने लगी, जो अब राजनीतिक लामबंदी तक पहुंच गई है।

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डीएम की ओर से शुरू में सीएचसी-पीएचसी, कांशीराम अस्पताल के निरीक्षण में मिलीं खामियों में सुधार करने और लापरवाह कर्मियों पर कार्रवाई के लिए सीएमओ हरिदत्त नेमी को निर्देश दिया था। आरोप है कि सीएमओ ने कोई कार्रवाई नहीं की। डीएम ने पत्र में यह भी लिखा है कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत रिक्त पदों का विज्ञापन संबंधित विभाग की वेबसाइट पर जारी नहीं किया गया। इसके साथ ही साक्षात्कारों का परिणाम भी चार दिन के अंदर प्रस्तुत नहीं किया।

प्रशासनिक नियंत्रण अत्यंत लचर व शिथिल
वित्त एवं लेखा सेवा से नामित वरिष्ठ वित्त एवं लेखाधिकारी डॉ. वंदना सिंह को वित्तीय परीक्षण एवं पदेन कार्यों से हटा दिया। उनके स्थान पर गैर वित्त सेवा कर्मी को नामित कर दिया। यही नहीं डॉ. आरएन सिंह, अपर मुख्य चिकित्साधिकारी समेत अन्य डॉक्टरों के 10 दिन के अंदर नौ बार तबादले के आदेश जारी कर दिए। इसी तरह तीन माह में जनपद की शासकीय स्वास्थ्य सेवाओं के केंद्रों का निरीक्षण किया गया, जिसमें पाया गया कि सीएमओ का प्रशासनिक नियंत्रण अत्यंत लचर व शिथिल है।
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पत्र में लिखा- यह सभी मामले गंभीर हैं
निरीक्षण के दौरान अनुपस्थित, चिकित्सा अभिलेखों में मरीजों की फर्जी प्रविष्टियां करने वाले चिकित्सकों के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं की गई। डीएम ने प्रमुख सचिव को लिखे पत्र में कहा कि यह सभी मामले गंभीर हैं। इनको संज्ञान में लेकर कार्रवाई करें। डीएम का संस्तुति पत्र जाने के बाद इधर सीएमओ अपने बचाव में उतर आए। बताया जा रहा है कि उन्होंने इसके लिए जनप्रतिनिधियों से मुलाकात कर अपने लिए डिप्टी सीएम चिकित्सा स्वास्थ्य को पत्र लिखने का आग्रह किया।
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