पर्याप्त डीजल उपलब्ध नहीं हो पा रहा
अब वहीं पर डीजल न मिलने से फंस गए हैं। अब उन्हें आने में ही छह से सात दिन लग जाएंगे। इससे तो उत्पादों की आपूर्ति ही प्रभावित हो जाएगी। इस स्थिति से लंबी दूरी के ट्रांसपोर्टर जो कानपुर, दिल्ली, उत्तराखंड या बिहार से गुजरात तक आवागमन करते हैं और मध्य प्रदेश से होकर गुजरते हैं, प्रभावित हो रहे हैं। उन्हें वापसी यात्रा के लिए पर्याप्त डीजल की आवश्यकता होती है, लेकिन अब उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। वाहन संचालन रुकने की स्थिति में ट्रांसपोर्टर न तो अपनी वाहन किस्तें चुका पाएंगे और न ही दैनिक खर्च एवं ड्राइवरों का भरण-पोषण कर पाएंगे।
शहर में पेट्रोल-डीजल की कोई कमी नहीं
पेट्रोल एंड एचएसडी डीलर्स एसोसिशन के अध्यक्ष संजय गुप्ता का कहना है कि कानपुर नगर, कानपुर देहात में मिलाकर 450 पेट्रोल-डीजल के पंप हैं। कहीं पर भी डीजल या पेट्रोल की कोई लिमिट नहीं लगाई गई है। जिसको जितना भी पेट्रोल या डीजल लेना है, वह खरीद सकता है। सोशल मीडिया पर अफवाहें चल रही हैं। लोग अफवाहों पर ध्यान न दें, कई वीडियो भी चल रहे हैं।
गुजरात में शहर के ट्रांसपोर्टरों के 1500 के करीब ट्रक फंस गए हैं। गुजरात में डीजल की लिमिट तय कर दी गई है जिससे ये संकट खड़ा हो गया है। गुजरात के अलग-अलग शहरों से कपड़ा, टाइल्स और कच्चा माल शहर आता है। -मनीष कटारिया, अध्यक्ष, यूपी मोटर ट्रांसपोटर्स एसोसिएशन
गुजरात और मध्य प्रदेश में पेट्रोल पंप संचालकों द्वारा डीजल आपूर्ति पर लिमिट लगाई जा रही हैं। जहां पहले आवश्यकता अनुसार डीजल उपलब्ध हो जाता था, वहीं अब 100–150 लीटर से अधिक डीजल देने से मना किया जा रहा है। कई ट्रक गुजरात में फंस गए हैं। -कंवल गांधी, ट्रांसपोर्टर