अपने शहर और मंदिरों को स्वच्छ रखना हमारा कर्तव्य है। विदेशों में जिस तरह लोग स्वच्छता का विशेष ध्यान रखते हैं उसी तरह हमें भी अपने देश को स्वच्छ रखना चाहिए। स्वच्छता केवल बाहरी नहीं बल्कि आंतरिक भी होनी चाहिए। मन, वचन और कर्म से भी शुद्धता बनाए रखना सच्ची भक्ति है। यह बातें मंगलवार को देवकीनंदन ठाकुर महाराज ने मोतीझील लॉन में विश्व शांति सेवा चैरिटेबल ट्रस्ट की ओर से आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन कहीं।
उन्होंने बताया कि सर्वेश्वरी श्री राधा रानी के गुणों का वर्णन कोई नहीं कर सकता क्योंकि वह स्वयं प्रेम और करुणा की मूर्ति हैं। उनके चरणों की महिमा इतनी अनंत है कि उसे शब्दों में बांधना असंभव है। जो व्यक्ति भगवान के उत्सवों में सम्मिलित होता है, उनका नाम सच्चे मन से जपता है और आराधना करता है भगवान स्वयं उसके पापों का नाश कर देते हैं। भगवान ने पुतना को मारा नहीं उसका उद्धार किया। यहीं भगवान श्रीकृष्ण की करुणा और दया का प्रमाण है।
उन्होंने कहा कि भगवान को छल, कपट, दिखावे या बाहरी आडंबर से कोई प्राप्त नहीं कर सकता। भगवान के निकट वही पहुंच सकता है जिसका मन निर्मल, भाव सच्चा और हृदय भक्ति से भरा हो। भगवान कपट से नहीं सच्चे प्रेम और समर्पण से प्रसन्न होते हैं। जीवन में हमें हमेशा सच्चे मन से भगवान की सेवा, नाम-स्मरण और भक्ति करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि माता-पिता का सदैव सम्मान करना चाहिए क्योंकि वह ही हमारे पहले गुरु हैं। उनके आशीर्वाद के बिना कोई भी सफलता नहीं मिलती। कथा के दौरान शिव प्रकाश गुप्ता, जयमाला सिंह, प्रभा शकर वर्मा, पूनम पांडेय, विपिन वाजपेयी, राम विनय यादव, सतीश गुप्ता आदि मौजूद रहे।