कानपुर देहात/रसूलाबाद। किसान के आत्महत्या करने के मामले में सुभाष नगर के देवी मंदिर के पीछे तालाब खोदाई की जांच के लिए गठित टीम ने चकबंदी अधिकारियों, कर्मचारियों एवं राजस्व कर्मियों के साथ पहुंच कर पैमाइश कराई।
ये लगभग साफ हो गया है कि तालाब से खनन कराकर नियम विरुद्ध मिट्टी हटाई गई है। खुदाई तालाब के रकबा में ही हुई है इस बाबत टीम ने अभी कुछ भी नहीं बताया।
किसान इंद्रपाल के आत्महत्या के मामले में डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह ने अवैध खनन के आरोपों की जांच के लिए एडीएम वित्त एवं राजस्व जेपी गुप्ता की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय टीम गठित की थी। टीम बुधवार को मौके पर पहुंची।
जांच के दौरान तालाब खुदाई वाले स्थल की पैमाइश की गई। पैमाइश के समय एडीएम जेपी गुप्ता, एसडीएम जीतेंद्र कटियार, तहसीलदार राजकुमार चौधरी, नायब तहसीलदार मनोज रावत, चकबंदी अधिकारी टीम के साथ मौजूद रहे।
चकबंदी अधिकारी ने वर्ष 1982 में बनाए गए नक्शे के अनुरूप जांच की। इसमें पता चला कि जहां खनन किया गया है वह तालाब की गाटा संख्या 2086 भूमि है। इस रकबा में खलिहान व एक काश्तकार को पट्टा किया गया था।
खलिहान व पट्टा आवंटित किसान की जमीन में खनन नहीं पाया गया है। तालाब से मिट्टी का खनन कराकर खाद के गड्ढे भराने काम पूरी तरह से नियम विरुद्ध है। एडीएम ने कहा कि जल्द ही जांच रिपोर्ट डीएम को भेजी जाएगी।
मिट्टी भराई करने वाले स्थान की भी हुई जांच
एडीएम जेपी गुप्ता ने तालाब के सुंदरीकरण के नाम पर खोदाई करके जहां मिट्टी की भराई की गई थी, वहां भी जांच की। चेयरमैन राजरानी व प्रतिनिधि अकील अहमद पट्टा के मकान के आसपास गड्ढों में मिट्टी भराकर उसे बराबर कराया गया है।
जांच में ये सामने आया कि जहां मिट्टी भराई की गई वह रकबा खाद के गड्ढों के नाम दर्ज है। वहां बड़ा गड्ढा था जिससे चेयरमैन व प्रतिनिधि को परेशानी हो रही थी। इससे गलत तरीके से खनन कराकर उसमें भराई करा दी।