कानपुर देहात। झींझक मंडी से इस्तीफा दे चुके वाटरमैन का तीन माह का वेतन निकाल दिया गया। गड़बड़ी की जानकारी पर संभागीय उप निदेशक प्रशासन एवं विपणन ने प्रभारी सचिव व लिपिक को निलंबित कर दिया। दोनों को कानपुर मंडी से संबद्ध किया गया है। फिलहाल झींझक मंडी में किसी सचिव व लिपिक की तैनाती नहीं की गई है।
झींझक निवासी संतोष त्रिपाठी ने पालिका अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ा था। इस दौरान किसी ने डीएम से शिकायत कर बताया कि संतोष त्रिपाठी झींझक मंडी में वाटरमैन के पद पर कार्यरत हैं। सरकारी सेवा में रहते हुए वह निकाय चुनाव लड़ रहे हैं।
इसपर संतोष त्रिपाठी ने पद से इस्तीफा दे दिया। उनका इस्तीफा सभापति व प्रभारी सचिव ने आगे की कार्यवाही के लिए नोटसीट समेत अग्रसारित कर दिया। इधर, चुनाव में संतोष त्रिपाठी की हार हुई।
कुछ समय शांत बैठने के बाद उन्होंने जुलाई में शिकायत कर दी कि तीन माह का वेतन नहीं दिया जा रहा है। इधर, प्रभारी सचिव (मूल पद मंडी निरीक्षक) अनिल कुमार अवस्थी व लिपिक ज्ञानेश कुमार ने इस्तीफा दे चुके संतोष त्रिपाठी का अप्रैल, मई व जून का वेतन निकाल दिया।
इस्तीफा दे चुके कर्मी का वेतन निकालने का मामला उच्चाधिकारियों के संज्ञान में आया। इसपर मंडी परिषद के संभागीय उप निदेशक प्रशासन एवं विपणन ने प्रभारी सचिव व लिपिक को निलंबित कर दिया। दोनों को कानपुर मंडी से संबद्ध किया है।
संभागीय उपनिदेशक प्रशासन एवं विपणन संतोष कुमार ने बताया कि इस्तीफा दे चुके कर्मी का वेतन निकालने की गड़बड़ी पर दोनों कर्मियों को निबंबित किया गया है। विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी।
खुद के जवाब में फंस गए मंडी के प्रभारी सचिव
संतोष त्रिपाठी ने बसपा से पालिका अध्यक्ष का चुनाव लड़ा। वह जीत के प्रति आश्वस्त थे तो शिकायत होने पर पद से इस्तीफा देकर चुनाव मैदान में डटे रहे। इधर हार का मुंह देखना पड़ा तब नौकरी का महत्व समझा। इस पर पैतरा चलते हुए तीन माह का वेतन नहीं दिए जाने की शिकायत कर दी। इस पर प्रभारी सचिव ने उच्चाधिकारियों को बताया कि शिकायतकर्ता का वेतन 11 जुलाई को दे दिया गया है। प्रभारी सचिव के इस जवाब के बाद गड़बड़ी की पुष्टि हो गई। इस पर मंडी के प्रभारी सचिव व लिपिक पर कार्रवाई की गई।