कानपुर देहात। बिजली कर्मचारियों की हड़ताल से जिले में शुक्रवार को आपूर्ति व्यवस्था बेपटरी हो गई। 33 केवीए लाइन में हुए फाल्ट से 10 सबस्टेशन बंद रहे। वहीं, 11केवीए लाइन में हुए फाल्ट से 20 से अधिक फीडर ठप हो गए।
इसके चलते सबस्टेशन व फीडरों से जुड़े करीब 675 गांवों की बिजली गुरुवार की शाम से गुल रही। चक्की कारखाने बंद हो गए तो सबमर्सिबल पंप नहीं चलने से पेयजल की किल्लत रही। इन्वर्टर दगा दे गए तो मोबाइल फोन चार्ज नहीं हो सके और लोगों का एक दूसरे से संपर्क टूट गया।
जिले में कुल 47 उपकेंद्र हैं। इनसे तीन लाख से अधिक कनेक्शनों को बिजली आपूर्ति होती है। पुरानी पेंशन बहाली, वेतन विसंगति दूर करने, निजीकरण पर रोक और संविदा कर्मियों के नियमतीकरण की मांग को लेकर बीते दिसंबर में ऊर्जा मंत्री से सहमति बनी थी।
लिखित समझौता भी हुआ था लेकिन मांगे पूरी नहीं हुई तो विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के आह्वान पर बुधवार को बिजली कर्मियों ने कार्य बहिष्कार कर दिया। गुरुवार रात 10 बजे से 72 घंटे की सांकेतिक संपूर्ण हड़ताल शुरू हुई।
इससे पहले ही आंधी बारिश शुरू हुई तो शाम छह बजे से 33 केवी लाइन में फाल्ट हो गए। इससे शाोभन, शिवली, कहिंजरी, झींझक, मंगलपुर, संगरसीपुर, अमराहट एक व दो और मुंगीसापुर उपकेंद्र ठप हो गए। शुक्रवार को शिवली उपकेंद्र बहाल हो गया लेकिन ग्रामीण फीडरों की बिजली गुल रही।
जबकि अन्य आठ उपकेंद्रों की बिजली 28 घंटे बाद भी बहाल नहीं हो सकी है। इन उपकेंद्रों से जुड़े करीब 575 गांवों की बिजली गुल है। सबमर्सिबल पंप नहीं चलने से लोग पेयजल की किल्लत झेल रहे हैं। इधर चक्की कारखाने भी बंद हैं।
शुक्रवार को दिन में 11.30 बजे जमालपुर में 33 केवी लाइन के पोल झुकने से अकबरपुर उपकेंद्र ठप हो गया। इससे तहसील, थाना और करीब आठ हजार घरों की बिजली गुल हो गई। देर शाम तक उपकेंद्र की बिजली बहाल नहीं हो सकी। जबकि रूरा के अकबरपुर व गहलौ, झींझक के अकारू, सट्टी के कमलपुर, बैरी सवाई, बक्सपुरवा आदि फीडर बंद रहने से करीब सौ गांवों में बिजली गुल है।