इससे उसे मां की हत्या की आशंका हुईं। मामले में पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर घर में ही दफनाए गए सरोज पाल के शव को खोज लिया था। इसके साथ सभी के खिलाफ विवेचना कर आरोप पत्र अदालत में दाखिल किया था। मामले की सुनवाई जिला एवं सत्र न्यायाधीश लालचंद्र गुप्ता की अदालत में चल रही थी।
शुक्रवार को अदालत ने सुनवाई करते हुए दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सरोज पाल के पति पतरौल, पुत्र मान सिंह व पुत्र की सास रानी को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। प्रत्येक पर छह-छह हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया है। वहीं, साक्ष्य के अभाव में आरोपी बहू सीमा को दोषमुक्त कर दिया है।
मां के हत्यारों को बेटी ने दिलाई सजा
सरोज पाल की बेटी सुधा ने मामले में मां के हत्यारों को सजा दिलाने के लिए रिश्तों की परवाह नहीं की। उसने पिता, भाई, भाभी व भाभी की मां के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई। इसके बाद इन सभी के खिलाफ अदालत में अपने बयान दर्ज कराने के साथ ही मामले की लगातार पैरवी की। इससे दोषियों को आजीवन कारावास की सजा मिली।
सरोज ने की थी दूसरी शादी
सरोज की बेटी सुधा ने अपने बयानों में बताया था कि जब वह पांच छह साल की थी, तब उसकी मां ने दूसरी शादी की थी। इसके बाद उसके सौतेले भाई का जन्म हुआ। शादी के बाद वह ससुराल आ गई। भाई का विवाह होने पर उसकी सास रानी देवी के अवैध संबंध उसके सौतेले पिता से हो गए। वह ज्यादातर उसके मां के घर पर रहने लगी थी। इसका विरोध करने पर सभी ने मिलकर उसकी मां