कानपुर देहात। यमुना का पानी भले ही घट गया हो, लेकिन ग्रामीणों की मुसीबतें कम नहीं हो रही हैं। अब बीमारी पैर पसार रही हैं। गांवों में अभी भी पानी भरा है। अफसर बाढ़ चौकियां बनाने का दावा कर रहे हैं। हकीकत में अमरौधा के प्रभावित कई गांवों के लोग रेलवे ट्रैक के किनारे डेरा डाले हैं। राज्यमंत्री अजीत सिंह पाल ने शुक्रवार को प्रभावित गांवों का दौरा कर ग्रामीणों को हर संभव मदद का आश्वासन दिया।
सिकंदरा और राजपुर प्रतिनिधि के मुताबिक शुक्रवार को यमुना का जलस्तर चार फिट कम हो गया है। पानी घटने के बाद गांव में बीमारियों ने पैर पसारना शुरू कर दिया है। बैजामऊ बांगर गांव में 12 लोग बुखार, खुजली और अन्य बीमारियों की चपेट में आ गए हैं। शुक्रवार को राज्यमंत्री अजीत सिंह पाल ने अधिकारियों के साथ कई गांवों का दौरा किया। राज्यमंत्री जैसलपुर, महदेवा, बैजामऊ बांगर गांव पहुंचे। उन्हें बताया गया कि बैजामऊ बृजनंदन निषाद, लाखन सिंह निषाद, रमेश, भूरेलाल, महेश बाबू, मुनीम जैसलपुर के गुरुमुख, भगवान दास, विजय कुमार, जय नरायन के कच्चे मकान ढह गए हैं।
राज्यमंत्री ने एसडीएम रमेश चंद्र यादव से मदद को कहा।
पुखरायां और मूसानगर प्रतिनिधि के मुताबिक सेंगुर का जल स्तर एक फुट घटा है। दो दर्जन गांवों का संपर्क मुख्य मार्ग से टूटा है। पेयजल, बिजली, मवेशियों के चारे और आवागमन की समस्या जस की तस है। चपरघटा, आढ़न, पथार, पडाव, रसूलपुर, भुण्डा, भरतौली, चतुरीपुरवा, मुसरिया, नगीना बांगर, बम्हरौली घाट, अहरैली घाट, देवराहट, क्योटरा बांगर, नयापुरवा, किशवा दुरौली, उमरिया, जगदीशपुर गांव पानी से घिरे हैं।
नगीना मोड़ हनुमान मंदिर, अमरौधा, दौलतपुर, देवराहट प्राथमिक विद्यालय और नगीना गांव में बाढ़ चौकियां बनाई हैं। एसडीएम राजीव राज ने बताया कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत सामग्री दी जा रही है। पथार गांव में 65 और क्यौंटरा गांव में 40 लोगों के खाने का इंतजाम किया गया है।