रनियां (कानपुर देहात)। रनियां के जिला उद्योग कार्यालय के पीछे स्थित कटीले तार बनाने वाली फैक्टरी परिसर में चल रहे रैपर छपाई प्लांट में सोमवार की सुबह शॉर्ट सर्किट से आग लग गई। लपटें उठती देख परिसर में रह रहे कर्मचारियों ने आग बुझाने के प्रयास किए।
राहत न मिलती देख जानकारी रनियां थाना पुलिस और दमकल विभाग को दी। दमकल कर्मियों ने करीब तीन घंटे की मशक्कत के बाग आग पर काबू पा लिया। आग से पान मसाला रैपर के रोल और अन्य सामान जला है। दमकल अधिकारी आग से हुए नुकसान का आकलन कर रहे हैं।
डीआईसी कार्यालय के पीछे मंगलम वायर ऑन फैक्टरी चलती है। फैक्टरी में दो शिफ्टों में काम होता है। इसमें 60 मजदूर काम करते है। परिसर में दो प्लांट लगे हुए है। पहले प्लांट में कटीले तार व दूसरे में पान मसाला रैपर की छपाई का काम होता है।
सोमवार की सुबह रैपर छपाई प्लांट में अचानक शार्ट सर्किट में आग लग गई। मशीनों से लपटे उठती देख फैक्टरी परिसर में बने कमरे में रह रहे कर्मचारियों में अफरातफरी हो गई। लोगों ने आग बुझाने का प्रयास किया। काफी प्रयास के बाद लपटें नहीं थमीं तो लोगों ने जानकारी रनियां थाना पुलिस और दमकल विभाग को दी।
इस पर मुख्य अग्निशमन अधिकारी सुरेंद्र सिंह, अग्निशमन अधिकारी कृष्ण कुमार तीन दमकल गाड़ियां लेकर मौके पर पहुंचे। रनियां थाना प्रभारी अनिल कुमार भी फैक्टरी के पास पहुंचे। दमकल कर्मियों ने पानी की बौछार कर आग बुझाने का काम शुरू किया।
करीब तीन घंटे मशक्कत के बाद आग बुझाई जा सकी। पानी खत्म होने पर दमकल कर्मियों ने मंटोरा ऑयल फैक्टरी से पानी लिया गया। आग बुझाने के दौरान मातादीन, सुरेश कुमार, सुनील कुमार, पवन कुमार, श्रीनारायण, उपेंद्र सिंह, रंजीत भास्कर, नितिन सिंह, प्रिंस कनौजिया, आनंद कुमार, दीपांशु, राजेश बाबू, दीपक जयसवाल आदि दमकल कर्मियों ने सहयोग किया। सीएफओ सुरेंद्र सिंह ने बताया कि फैक्टरी में शॉर्ट सर्किट से आग लगी है। आग से पान मसाला रैपर के रोल व अन्य सामान जा है। नुकसान का आकलन किया जा रहा है।
फैक्टरी कई वर्षों से संचालित है। यहां रैपर (पन्नी) छपाई के दौरान थिनर का प्रयोग किया जाता है। इसके बाद भी फैक्टरी में आग बुझाने के उपकरण नहीं है। पानी की पाइप लाइन नहीं डाली गई है। फायर विभाग की एनओसी भी नहीं है। फैक्टरी प्रबंधन को नोटिस दी जाएगी।
पन्नी छपाई प्लांट दिखाने से कतराता फैक्टरी प्रबंधन
फैक्टरी का कभी भी कोई भी अधिकारी निरीक्षण करने को जाता था, तो फैक्टरी प्रबंधन पन्नी छपाई प्लांट नहीं दिखाता था। केवल वह कटीले तार का प्लांट दिखाने के बाद टरका देता था। यह बात फायर अधिकारियों के बीच चर्चा का विषय बनी रही कि इस प्लांट का फैक्टरी प्रबंधन ने कभी निरीक्षण नहीं कराया।