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पेट्रोल डालकर जलाए गए युवक की उपचार के दौरान मौत

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रूरा (कानपुर देहात)। इकघरा गांव में विवाद में पेट्रोल डालकर जलाए गए युवक ने दम तोड़ दिया। गांव में तनाव देखते हुए पुलिस तैनात की गई है। मृतक के चचेरे भाई ने दुकानदार समेत छह लोगों पर हत्या के प्रयास की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें एक आरोपी को पुलिस गिरफ्तार भी कर चुकी है।
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इकघरा गांव निवासी मानवेंद्र उर्फ राजन (24) आठ दिसंबर को गांव के ही संजय की परचून की दुकान में चीनी लेने गया था। लेनदेन को लेकर दोनों में विवाद हो गया। आरोप है कि संजय ने अपने परिवारीजनों के सहयोग से मानवेंद्र को पीटने के बाद दुकान के अंदर बंद करके पेट्रोल डालकर आग लगा दी थी। लोगों ने गंभीर रूप से झुलसे मानवेंद्र को दुकान से निकाल कर पुलिस को सूचना दी थी। कानपुर के हैलट अस्पताल में उसका उपचार चल रहा था। बुधवार की शाम परिजन उसे कानपुर के एक निजी अस्पताल ले गए।
वहां उसकी मौत हो गई। पोस्टमार्टम के बाद परिजन शव लेकर गांव आए। गांव के बाहर खेतों में अंतिम संस्कार कर दिया गया। गांव में क्यूआरटी तैनात कर दी गई। सीओ अर्पित कपूर, एसओ रूरा विद्यासागर सिंह पुलिस बल लेकर गांव में मौजूद रहे। मानवेंद्र के चचेरे भाई ने दुकानदार संजय, धर्मेंद्र, रामू, सरवन, शिवबीर व रामपाल पर हत्या के प्रयास की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस शिवबीर को गिरफ्तार कर चुकी है। एसओ विद्यासागर सिंह ने बताया कि अब हत्या की धारा बढ़ाई जाएगी। फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है।
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एकघरा गांव में मानवेंद्र उर्फ राजन की मौत के बाद उसके पिता विजय वीर बिलखनेे लगे। मृतक के ताऊ दलजीत सिंह ने बताया कि मानवेंद्र चार भाइयों में सबसे छोटा था। उसके छोटे भाई की दस वर्ष पूर्व बीमारी से मौत हो गई थी। चार वर्ष पहले एक और बड़े भाई पुष्पेंद्र की रनियां में सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। दो बेटों की मौत से विजय वीर गुमसुम रहते थे। अब मानवेंद्र की मौत के बाद विजय वीर बुरी तरह से टूट गए। तीन बेटों की मौत होने के बाद विजय वीर के सामने दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। अब एक बेटा कौशलेंद्र उनका सहारा है।
मानवेंद्र की हत्या का मुख्य आरोपी दुकानदार संजय यादव और उसका भाई धर्मेंद्र पहले भी गांव के एक व्यक्ति पर जानलेवा हमला कर चुके हैं। वर्ष 2011 में दोनों भाइयों ने मामूली बात में गांव के ही एक व्यक्ति पर धारदार हथियार से हमला कर घायल कर दिया था। मामले में रिपोर्ट दर्ज हुई थी। कुछ समय बाद ग्रामीणों ने दोनों पक्षों में समझौता करा दिया था।
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