जितेंद्र की मौत पर बिलखते परिजन।
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कानपुर देहात। अकबरपुर कोतवाली क्षेत्र के मुक्तापुर गांव के पास बुधवार की शाम कार की टक्कर से सुरती रूरा के ऑटो चालक की मौत हो गई। उसके गांव का ही एक युवक घायल हो गया। ग्रामीणों ने ऑटो चालक का शव रखकर अकबरपुर-रूरा मार्ग में जाम लगा दिया। इसकी जानकारी पर एएसपी, एसडीएम व सीओ पहुंचे। कई थानों का फोर्स बुलाया गया। करीब एक घंटे बाद पुलिस ने वाहनों को निकालना शुरू कर दिया। इसके बाद पहुंचीं विधायक ने समझाकर हंगामा शांत करवाया और शव हटवाया। कुल दो घंटे जाम की स्थिति रही।
सरसी रूरा गांव के निवासी जितेंद्र उर्फ पिंटू (26) के पास ऑटो है। वह आटो चलाकर परिवार का भरण पोषण कर रहा था। बुधवार को शाहपुर दोल्हू गांव से बहन सीता तिलक करने आई थी। वह ऑटो लेकर घर पहुंचा था। बहन से तिलक कराने के बाद शाम छह बजे जल्दी आने की बात कहकर ऑटो में सीएनजी भराने अकबरपुर जा रहा था। गांव का ही अजमत अली (25) भी बैठा था। मुक्तापुर गांव के सामने आ रही कार ने ऑटो में टक्कर मार दिया। आटो पलट गया। चालक जितेंद्र की मौके पर ही मौत हो गई। जबकि उसका साथी गंभीर रुप से घायल हो गया।
परिजनों ने उसे अकबरपुर के निजी अस्पताल में भर्ती कराया। मृतक के परिजनों ने मुआवजे की मांग को लेकर सड़क पर शव रखकर जाम लगा दिया। इसकी जानकारी पर एएसपी अनूप कुमार, एसडीएम आनंद कुमार सिंह, सीओ संदीप सिंह मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों को समझाकर आधी सड़क खाली कराई। इसके बाद आवागमन शुरू कराया। दोनों ओर वाहनों की लंबी लाइनें लग गई।
घटना की जानकारी पर अकबरपुर रनियां विधायक प्रतिभा शुक्ला, पूर्व सांसद अनिल शुक्ला वारसी पहुंचे। परिजनों को हर संभव मदद का भरोसा देकर शव हटवाया। कोतवाल आमोद कुमार सिंह ने बताया कि दुर्घटनाग्रस्त वाहनों को कब्जे में लेकर शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है।
नहीं पता था कि अंतिम बार कर रही तिलक
मृतक जितेंद्र उर्फ पिंटू चार भाइयों में दूसरे नंबर का था। मृतक की एकलौती बहन सीता है। शादी रसूलाबाद क्षेत्र के शाहपुर दोल्हू गांव में हुई थी। भैयादूज पर भाइयों को तिलक करने आई थी। बहन की आने की जानकारी पर जितेंद्र ऑटो लेकर घर पहुंच गया था। भाई की मौत की खबर सुनते ही बिलखते हुए वह पहुंची। वहां कहती रही नहीं पता था कि अंतिम बार तिलक कर रही है। ऐसा जानती तो भाई को जाने ही न देती। वहीं मृतक की पत्नी सोनम, बेटियां सुप्रिया (5) अन्नू (3) बिलखती रहीं। पिता साहब लाल, भाई रज्जन, धीरेंद्र व प्रमोद भी रोते रहे। ग्रामीण उन्हें ढांढस बंधाते रहे।