राजपुर (कानपुर देहात)। मानसून के शुरुआती दौर में कम बारिश के बीच किसी तरह फसल तैयार करने वाले किसानों की उम्मीदों पर सितंबर की बारिश ने पानी फेर दिया। मंगलवार की रात से शुरू हुई बारिश का सिलसिला शुक्रवार को भी जारी रह
ा। इससे 20 गांवों के 500 से अधिक किसानों के 1500 बीघा खेत में तैयार की गई बाजरा, कुम्हडा, कददू व तिल की फसलें पानी में डूबी हैं। किसानों को इनके खराब होने की चिंता सता रही है।
सिकंदरा तहसील क्षेत्र में बीहड़ पट्टी के किसानों की आजीविका खेती पर आधारित है। जून से अगस्त के पहले सप्ताह तक क्षेत्र में बारिश नहीं हुई। किसानों ने खेतों में जुताई के बाद खाद, बीज की व्यवस्था की।
फिर किसी तरह महंगे डीजल से खेत की सिंचाई करते रहे। जब खेतों में फसलें लहलहाई तो किसानों में लागत निकलने की उम्मीद जगी, लेकिन सितंबर में भारी बारिश से फसल डूब गई।
इससे बीहड़ पट्टी के बेहमई, जैसलपुर, महदेवा, खोजा रामपुर, अनवा, पिटाकपुर, बकसौधी समेत 20 से अधिक गांवों के 500 से ज्यादा किसानों की 1500 बीघा खेतों में तैयार बाजरा, कुम्हडा, कददू व तिल की फसलों को भारी नुकसान हुआ है।
जैसलपुर गांव के नरेंद्र सिंह, अनवा के जयसिंह, पिटाकपुर के रामकुमार सिंह, बेहमई के शिवपाल, गौरीरतन बागर गांव के भगत सिंह, महदेवा के साहिब सिंह, इंदपुरा के सुरेंद्र सिंह ने बताया कि बारिश से सैकड़ों बीघा फसलें जलमग्न हो गई हैं। धूप निकलने पर फसल सड़ कर खराब हो जाएगी।