कानपुर के दागी दरोगा दयाशंकर वर्मा के प्रेसवार्ता करने के एलान के बाद रविवार को उसको पुलिस लाइन में कैद कर दिया गया। उस पर पहरा बैठा दिया गया। जिससे वह प्रेसवार्ता करने नहीं जा सका। दरोगा का दावा है कि ज्वाइंट सीपी आनंद प्रकाश तिवारी वहां मौजूद रहे। उन्होंने जाने से रोक दिया।
दूसरी तरफ जिस जगह पर उसने प्रेसवार्ता करने की बात कही थी वहां भी पुलिस बल मौजूद रहा। अब दरोगा के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाएगी। इस पर अफसर विचार कर रहे हैं। दरोगा दयाशंकर वर्मा सात साल पहले बर्रा थाने में मुंशी था। लुटेरे से पचास हजार रुपये की रिश्वत लेने के मामले में उसको जेल भेजा गया था।
जिसका मुकदमा चल रहा है। दरोगा का आरोप है कि तत्कालीन थानाध्यक्ष ने उसको फर्जी केस में फंसाया था। थानेदार व अन्य पुलिसकर्मी उसमें शामिल थे। खुद के बचाव की वजह से उसको फंसाया गया। इस संबंध में उसने शनिवार को एक मैसेज व्हाट्सएप पर वायरल किया।
जिसमें बताया गया था कि वह रविवार को किदवई नगर स्थित एक अखबार के दफ्तर में प्रेसवार्ता करेगा। मैसेज मिलने के बाद पुलिस अफसरों में हड़कंप मच गया था। ज्वाइंट सीपी आनंद प्रकाश तिवारी लाइन पहुंचे। दरोगा से बातचीत की। दरोगा का कहना है कि उसको लाइन से पीसी के लिए जाने नहीं दिया गया। अगर पुलिस का पहरा न होता तो प्रेसवार्ता करता।
रिकॉर्डिंग सौंपी, जांच के आदेश
दरोगा ने जिस मामले में पुलिसकर्मियों पर आरोप लगाए हैं उसी संबंधित कुछ कॉल रिकॉर्डिंग ज्वाइंट सीपी को सौंपी है। दावा है कि रिश्वतखोरी में थोनदार व अन्य पुलिसकर्मी शामिल हैं। इस मामले में एसीपी स्तर के अधिकारी से जांच कराने के आदेश हुए हैं। केस सात साल पुराना है। दरोगा पर रिश्वतखोरी के कई आरोप लगे हैं लेकिन सात साल पुराने वाले मामले मेें थानेदार की भूमिका सबसे अधिक संदिग्ध है।
दरोगा को निलंबित किया जा चुका है। उसने जो रिकॉर्डिंग सौंपी हैं, उसकी भी जांच के आदेश दे दिए गए हैं। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे उस आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
असीम अरुण, पुलिस कमिश्नर