छात्रों के भविष्य के साथ भी खिलवाड़ भी
बिना यह सोचे कि परीक्षा के नौ दिन पहले दाखिला देने से कोर्स और 90 दिनों की पढ़ाई का मानक कैसे पूरा होगा। अब प्रवेश लेने वाले छात्रों को न तो पर्याप्त कक्षाएं मिल सकेंगी और न ही पाठ्यक्रम पूरा हो पाएगा। शिक्षाविदों का कहना है कि यह कदम न केवल गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के मानकों को कमजोर करता है बल्कि छात्रों के भविष्य के साथ भी खिलवाड़ भी है।
डब्ल्यूआरएन में दिक्कत को सुधारने का एक और मौका
वहीं कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने बताया कि यह डब्ल्यूआरएन स्नातक के छात्रों के लिए नहीं था। केवल ऐसे छात्र जिन्होंने स्पेशल बैक दिया था या परास्नातक के वह छात्र जिनका परिणाम देरी से जारी हुआ उनका ही डब्ल्यूआरएन जनरेट किया गया है। जिन डिग्री कॉलेजों ने दाखिले लिए हैं उनको स्वीकार नहीं किया गया है। हां जिनके डब्ल्यूआरएन में दिक्कत थी, उनको सुधारने का एक और मौका दिया गया है। छात्र हित में यह काम किया गया है।
अप्रैल से चल रही दाखिले की प्रक्रिया
विश्वविद्यालय ने अप्रैल से ही स्नातक और परास्नातक कक्षाओं में दाखिले की प्रक्रिया शुरू कर दी थी। निजी महाविद्यालयों में स्नातक और परास्नातक में दाखिले की स्थितियां काफी खराब रही। कई पाठ्यक्रमों में मुश्किल से 30 से 40 प्रतिशत तक छात्र-छात्राओं ने दाखिला लिया।