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सीएसए यूनिवर्सिटी: फालसा, कैथा, बेल फिर बनेंगे सेहत के पहरेदार, उत्पादन क्षेत्र बढ़ाने के लिए प्रोजेक्ट शुरू

Thu, 01 Oct 2026 09:44 AM IST
Himanshu Awasthi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur News: कुपोषण, एनीमिया, डायबिटीज और ब्लड प्रेशर जैसी जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों के दौर में अब नई पीढ़ी द्वारा भुलाए जा रहे पारंपारिक फलों जैसे फालसा, कैथा, बेल, करौंदा, महुवा आदि को पुनर्जीवित करने की पहल शुरू हुई है।
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प्रो. वीके त्रिपाठी, अधिष्ठाता उद्यान संकाय एवं निदेशक प्रसार - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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करौंदा, झरबेरी के बेर, कैथा, खिरनी, महुवा सरीखे फल जिन्हें नई पीढ़ी भूल रही है। हकीकत में यही सेहत की संजीवनी है। ऐसे समय में जब कुपोषण, एनीमिया, डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, गुर्दा, लिवर रोग बढ़ रहे हैं, तो इन छोटे फलों के सेवन की कवायद भी शुरू हुई है। अब लोगों को इनके फायदे बताए जाने के साथ ही इन फलों के उत्पादन क्षेत्रफल को भी बढ़ाने के लिए प्रोजेक्ट शुरू किए गए हैं।

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सदियों से लोगों की सेहत को संभाले रहने वाले इन छोटे फलों के लिए सीएसए के कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) के स्तर से अभियान छेड़ा जा रहा है। इसके साथ ही केंद्र सरकार की एजेंसियों की ओर से बुंदेलखंड और प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में छोटे फलों के विकास का प्रोजेक्ट चलाया जा रहा है। बाजारों में रसायनों से पकाए गए और कीटनाशक के छिड़काव वाले फल फायदे के बजाए शरीर में रोग पैदा कर रहे हैं।

विभिन्न छोटे फलों में ये हैं शामिल
इसके साथ ही चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विवि किसानों को इन फलों का क्षेत्रफल बढ़ाने के लिए भी जागरूक कर रहा है। उद्यान संकाय के अधिष्ठाता और निदेशक प्रसार प्रोफेसर वीके त्रिपाठी का कहना है कि विभिन्न छोटे फलों में फालसा, लोकाट, करौंदा, मैंगोस्टीन, जंगल जलेबी, कमरख, बेल, कैथा, बारबाडोस चेरी और लसोड़ा आदि प्रमुख हैं। बारबाडोस चैरी विटामिन का धनी स्रोत है।

कुपोषण, एनीमिया आदि रोगों में मिलेगा फायदा
जामुन शरीर में शर्करा की मात्रा को नियंत्रित करता है। करौंदा आयरन की मात्रा बढ़ाता है। लसोड़ा से गुणों से भरपूर अचार तैयार करते हैं। अलायंस आफ बायो डायवर्सिटी के कंट्री डायरेक्टर डॉ. जयचंद राणा के मुताबिक इन फलों की तरफ फिर से लौटने के लिए प्रोजेक्ट शुरू किए गए हैं। इनकी पौष्टिक गुणवत्ता बहुत उच्च श्रेणी की होती है। ये फल लोगों को आसानी से मिल जाते हैं और विशुद्ध जैविक होते हैं। इससे कुपोषण, एनीमिया आदि रोगों में फायदा मिलेगा।

अभी ये फल कम क्षेत्रफल में पैदा हो रहे हैं। इनके विभिन्न उपयोग और विशिष्ट गुणों के कारण इनकी उपलब्धता बढ़ाने के लिए उपयोग एवं उत्पादन तकनीक का भी निर्धारण किया जाना है। सीएसए के विभिन्न कृषि विज्ञान केंद्रों पर भी रोपण के साथ प्रशिक्षण भी दिए जाने की योजना है।  -प्रो. वीके त्रिपाठी, अधिष्ठाता उद्यान संकाय एवं निदेशक प्रसार
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इन फलों की पौष्टिकता
  • फालसा- ब्लड शुगर नियंत्रण, पाचन शक्ति, कोलेस्ट्राल सुधारता है, आयरन से भरपूर।
  • लोकाट- विटामिन सी, भरपूर एंटी आक्सीडेंट, फाइबर और पैक्टिनयुक्त होता है।
  • बेर- विटामिन सी, फाइबर, एंटी आक्सीडेंट से भरपूर, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है
  • करौंदा- आयरन अधिक होता है, विटामिन सी, प्राकृतिक अम्लों से भरपूर होता है।
  • मैंगोस्टीन- एंटी ऑक्सीडेंट, फाइबर, सूजनरोधी गुण, पोटेशियम, मैग्नीशियम होता है।
  • जंगल जलेबी- फाइबर, कब्ज, गैस, पाचन की समस्या दूर होती है, कैल्शियम भरपूर।
  • कमरख- पाचन सुधारता है, विटामिन सी, एंटी आक्सीडेंट प्रचुर मात्रा में होते हैं।
  • बेल- दस्त में लाभकारी, अपच दूर, कैल्शियम, आयरन, डायटरी फाइबरयुक्त।
  • कैथा- कब्ज, दस्त, अपच में फायदेमंद, कैल्शियम, आयरन, फास्फोरस, विटामिन बी।
  • लसोड़ा-कैल्शियम, फास्फोरस से भरपूर, खराब कोलेस्ट्राल कम करता है।
  • महुवा- हड्डियां मजबूत, खून की कमी दूर करता है, पाचन तंत्र ठीक, त्वचा और बालों के लिए लाभकारी।
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