फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

UP: बेटे की गवाही ने हत्यारे पिता को दिलाई उम्रकैद, पांच साल पहले चापड़ से कर दी थी हत्या, जानिए पूरा मामला

Fri, 15 Dec 2023 09:25 AM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur Crime: एडीजीसी रवींद्र अवस्थी ने बताया कि अभियोजन की ओर से 10 गवाह कोर्ट में पेश किए गए। वादी मुकदमा बेटे, मृतका की बहन व पिता के अलावा मकान में किराये पर रहने वाली महिला ने भी गवाही दी थी।
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

कानपुर में पांच साल पहले सिपाही पत्नी की हत्या करने वाले पति को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। जिला जज प्रदीप कुमार सिंह ने उस पर 20 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया है। वैसे तो इस मामले में 10 गवाह पेश किए गए, लेकिन बेटे की गवाही अहम रही।

विज्ञापन

वह हत्या का चश्मदीद गवाह था और उसी ने पिता के खिलाफ रिपोर्ट भी दर्ज कराई थी। नौबस्ता क्षेत्र के खाड़ेपुर योगेंद्र विहार निवासी वीरेंद्र सिंह भदौरिया पत्नी शारदा व बेटे शिवसिंह के साथ रहता था। शारदा उन्नाव कोतवाली में हेड कांस्टेबल थी। वीरेंद्र शारदा के चरित्र पर शक करता था।
इसके चलते दोनों के बीच झगड़े होते थे। 20 नवंबर 2018 की सुबह बेटा शिवसिंह शौच के लिए गया था तभी पति-पत्नी में झगड़ा हुआ। वीरेंद्र ने शारदा की चापड़ से काटकर हत्या कर दी।  शोर सुनकर बेटा शिवसिंह आया, तो पिता को मां पर हमला करते देखा था। बेटे को देख वीरेंद्र भाग निकला था।

विज्ञापन

कोर्ट ने वीरेंद्र को हत्या का दोषी मानकर सजा सुनाई
शिवसिंह ने पिता के खिलाफ नौबस्ता थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। एडीजीसी रवींद्र अवस्थी ने बताया कि अभियोजन की ओर से 10 गवाह कोर्ट में पेश किए गए। वादी मुकदमा बेटे, मृतका की बहन व पिता के अलावा मकान में किराये पर रहने वाली महिला ने भी गवाही दी थी। सबूतों और गवाहों के आधार पर कोर्ट ने वीरेंद्र को हत्या का दोषी मानकर सजा सुनाई।

बेटे ने पुलिस को दी थी सूचना...पिता ने कर दी मां की हत्या
शारदा के 20 वर्षीय बेटे शिवसिंह ने चश्मदीद गवाह के रूप में गवाही दी। उसने अपनी आंखों के सामने हत्या होने की बात कोर्ट को बताई। उसी ने डायल 100 पर हत्या की सूचना दी थी और पिता के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। मकान में रहने वाली किरायेदार अनीता द्विवेदी ने भी बताया था कि शिवसिंह के चीखने की आवाज सुनकर वह भी पहुंची थी। उसने वीरेंद्र को भागते देखा था।
विज्ञापन

कोर्ट के कहने पर विशेष अधिवक्ता ने की बहस
मुकदमे में पैरवी के लिए वीरेंद्र के पास कोई अधिवक्ता नहीं थी। अदालत की ओर से उसे न्याय मित्र दिया गया था। अधिवक्ता शिवाकांत दीक्षित ने बताया कि वह अपने मुकदमे की सुनवाई के लिए जिला जज की अदालत में मौजूद थे। इसी दौरान मुकदमे में नियुक्त न्याय मित्र निशा सक्सेना का स्वास्थ्य खराब होने के चलते जिला जज ने उनसे मुकदमे में बहस करने को कहा। जिस पर उन्होंने विशेष अधिवक्ता के रूप में वीरेंद्र की ओर से मुकदमे में पक्ष रखा।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें