सौर ऊर्जा का बड़े स्तर पर इस्तेमाल जरूरी
इससे भारत में सीपीवी मॉड्यूल बनाने वाली कंपनियों को अपने उत्पाद की गुणवत्ता और क्षमता की जांच के लिए देश से बाहर नहीं जाना पड़ेगा। नई सौर तकनीक को लैब से निकालकर बड़े पैमाने पर इस्तेमाल और उत्पादन तक पहुंचाने में मदद मिलेगी। प्रो. आशीष गर्ग ने कहा कि 2070 तक नेट-जीरो लक्ष्य को हासिल करने के लिए सौर ऊर्जा का बड़े स्तर पर इस्तेमाल जरूरी है। सिर्फ सोलर पैनल बनाना ही नहीं, उनकी जांच की सुविधाएं भी विकसित करना जरूरी है।
क्या है सन सिम्युलेटर
सन सिम्युलेटर ऐसी मशीन है, जो प्रयोगशाला में सूरज की रोशनी जैसी परिस्थितियां तैयार करती है। वैज्ञानिक यह जांच सकते हैं कि कोई सौर मॉड्यूल धूप में कितना अच्छा काम करेगा। अभी देश में सामान्य सोलर पैनल की जांच के लिए तो सुविधाएं हैं, लेकिन सीपीवी मॉड्यूल की जांच की विशेष सुविधा उपलब्ध नहीं है।
सामान्य सोलर पैनल से अलग है सीपीवी
सीपीवी में सामान्य सोलर पैनल की तरह पूरी सतह पर सोलर सेल नहीं लगे होते। इसमें लेंस की मदद से सूर्य की रोशनी को एक छोटे से हिस्से में केंद्रित किया जाता है। वहां विशेष तरह के सोलर सेल लगे होते हैं। इन सेल में कई परतें होती हैं। सूर्य की रोशनी के अलग-अलग हिस्सों को अलग-अलग परतें ग्रहण करती हैं। सीपीवी तकनीक बहुत कम जगह में अधिक बिजली पैदा करती है।
सीधे सूरज की रोशनी जरूरी
सीपीवी मॉड्यूल की एक खास बात यह है कि ये सामान्य सोलर पैनल की तरह हर तरह की रोशनी में काम नहीं करते हैं। इन्हें सीधी और लगभग समानांतर सूर्य की किरणों की जरूरत होती है। इनकी जांच के लिए भी ऐसा सन सिम्युलेटर चाहिए, जो सूरज की रोशनी की दिशा, उसकी तीव्रता और उसके अलग-अलग हिस्सों का सही संतुलन तैयार कर सके।