कोरोना से ठीक हुए कुल - 77 हजार 199 रोगी
अस्पतालों में ठीक हुए- 10691 रोगी
होम आइसोलेशन में ठीक हुए- 66508 रोगी
- आकलन के मुताबिक पोस्ट कोविड डेथ- 2000 रोगी
- सांस की दिक्कत से मरे- 50 फीसदी
- डायबिटीज अनियंत्रित होने से दिक्कतों से मरे- 18 फीसदी
- हार्ट की दिक्कत होने से मरे -15 फीसदी रोगी
- गुर्दा की दिक्कत से मरे - 10 फीसदी रोगी
- कैंसर, ब्रेन अटैक आदि से मरे- सात फीसदी रोगी
आरटीपीसीआर निगेटिव होता है तो लगता है कि रोगी ठीक हो गया। लेकिन होता नहीं है। पोस्ट कोविड स्थिति में स्टेरॉयड, रेमडेसिविर सरीखी दवाओं का साइड इफैक्ट रहता है। इससे रोगियों की तबीयत बिगड़ने लगती है और फिर मौत हो जाती है। एंटी बायोटिक के भी साइड इफैक्ट रहते हैं। रोगियों के निगेटिव होने के बाद खून पतला करने वाली दवाएं बंद कर दी जाती हैं। इससे बाद में ब्लड क्लॉटिंग हो जाती है जो मौत का कारण बनती है। - डॉ. आरती लालचंदानी, पूर्व प्राचार्य जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज
कोविड निगेटिव होने के बाद रोगी को दिक्कत रहती है। इससे हार्ट अटैक, ब्रेन अटैक और सांस की दिक्कत होने का खतरा रहता है। बहुत से रोगियों की बाद में तबियत बिगड़ जा रही। -डॉ. प्रेम सिंह, सीनियर फिजिशियन