रोगियों को ऑक्सीजन की भी बहुत जरूरत पड़ रही है। इसी तरह के रोगी कोविड स्टेटस वाले अस्पतालों में भी आए हैं। स्थिति गंभीर होने पर उन्हें हैलट रेफर कर दिया जा रहा है। इन रोगियों को कोविड रोगियों की तुलना में जल्दी वेंटिलेटर की जरूरत पड़ रही है।
केस-1
किदवईनगर की 56 साल की महिला रोगी का ऑक्सीजन लेवल 50 होने पर उन्हें हैलट इमरजेंसी लाया गया। ऑक्सीजन लगाने के बाद भी लेवल में सुधार नहीं हुआ। कोरोना की जांच के लिए सैंपल भेजा गया। रिपोर्ट निगेटिव आई। दो दिन के अंदर रोगी को वेंटिलेटर की जरूरत पड़ गई।
केस- 2
तिलकनगर के 76 साल के वृद्ध को अचानक बहुत तेज कमजोरी आई और सांस फूलने लगी। इसके अलावा कोई लक्षण नहीं था। ऑक्सीजन तेजी से गिरी। ऑक्सीजन सपोर्ट के बाद भी स्थिति नहीं सुधरी तो एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया। सीटी स्कैन में फेफड़ों की स्थिति बहुत खराब निकली।
वायरस का म्यूटेशन चला करता है। यह कोरोना का ही कोई नया स्ट्रेन हो सकता है। आरटीपीसीआर जांच को लेकर इसकी सेंसिटिविटी कम हो सकती है। इसीलिए शासन ने कोरोना जैसे लक्षण वाले रोगियों का इलाज कोविड अस्पताल के अलग वार्ड में करने के निर्देश दिए हैं।- डॉ. जीके मिश्रा, अपर निदेशक, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण