फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कानपुर: कोविड अस्पतालों में लूट की छूट, नियम गए टूट, तीमारदारों को मरीज की जानकारी तक नहीं मिल पा रही

Sun, 09 May 2021 09:57 AM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

तीमारदारों की सहूलियत के लिए अस्पतालों में न रेट लिस्ट चस्पा है न ही नोडल अफसरों के नंबर। मरीज की हालत बताने के लिए बुलेटिन का टाइम तक निर्धारित नहीं।
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

कानपुर में कोविड अस्पतालों के लिए जारी की गई प्रशासन की एक भी गाइडलाइन का गंभीरता से पालन नहीं किया जा रहा है। जिलाधिकारी रोज कोविड अस्पतालों का निरीक्षण कर हिदायत दे रहे हैं, लेकिन प्राइवेट अस्पताल उनके निर्देशों को चुनौती देते हुए मनमानी पर उतारू हैं।
विज्ञापन


तीमारदारों की सहूलियत के लिए अस्पतालों में न रेट लिस्ट चस्पा है न ही नोडल अफसरों के नंबर। मरीज की हालत बताने के लिए बुलेटिन का टाइम तक निर्धारित नहीं। पहले भारी भरकम रकम जमा करा अस्पताल प्रबंधन मरीजों को भर्ती कर रहे हैं। इसके बाद भी दो-दो सप्ताह तक तीमारदार अपने मरीजों का हाल तक नहीं देख पा रहे हैं। कभी मरीजों की हालत खतरे से बाहर बता दी जाती है, तो कभी बहुत गंभीर। 

ये नियम नहीं मान रहे अस्पताल
बिना एडवांस लिए पहले इलाज शुरू करने, अस्पतालों में सुबह शाम खाली बेडों की संख्या बताने, आईसीयू की संख्या सार्वजनिक करने, अस्पताल की रेट लिस्ट सार्वजनिक करने के साथ ही मरीजों की लाइव स्थिति तीमारदारों तक पहुंचाने के लिए स्क्रीन की व्यवस्था करने के निर्देश जिलाधिकारी न जाने कितनी बार दे चुके हैं। इन सभी निर्देशों को बर्रा स्थित प्रिया व नौबस्ता स्थित फैमिली, एसआईएस हॉस्पिटल व शारदा नगर स्थित फार्च्यून अस्पतालों ने हवा में उड़ा रखा है।
विज्ञापन


सिर्फ पैकेज में ही बात करो
अस्पतालों के बाहर मौजूद तीमारदारों के अनुसार किसी को 15 दिनों के इलाज का पैकेज 2.50 लाख बताया जाता है, तो किसी को 1.50 लाख। अस्पताल के अंदर मरीज का क्या इलाज किया गया, किस स्थिति में रखा जा रहा है। इसकी तक जानकारी नहीं मिल पा रही है।

पहले बताया ठीक, अब बता रहे गंभीर
बर्रा प्रिया अस्पताल में भर्ती एलआईसी से रिटायर्ड डेवलपमेंट ऑफीसर बृजेश नारायण श्रीवास्तव (62) के बेटे समीर ने बताया कि पिता 15 दिनों से अस्पताल में भर्ती हैं। 2.62 लाख का पैकेज बताया गया है। एक लाख जमा कर चुके हैं। यहां रोज 3 बजे से पांच बजे के बीच तीमारदारों को मरीजों की स्थिति बताई जाती है। पूर्व में हालात में सुधार होने की जानकारी दी गई थी, लेकिन अचानक उनका ऑक्सीजन लेवल गिरने की बात कही जाती है। प्रबंधन बचे 1.62 लाख रुपये जमा करने का दबाव बना रहा है। 

एक स्क्रीन की तो व्यवस्था करनी चाहिए
प्रिया अस्पताल में भर्ती श्रवण कुमार (68) के बेटे विजय बाजपेई ने बताया कि उन्हें 2.40 लाख का पैकेज बताया गया था। एक लाख जमा कर चुके हैं। 15 दिन पूर्व भर्ती कराया था। इस लूट पर सरकार चुप है। प्रशासन को कम से कम अस्पतालों को गेट पर एक स्क्रीन की व्यवस्था सख्ती के साथ करानी चाहिए। इससे मरीजों की लाइव स्थिति का तीमारदारों को पता चल सके। तरह-तरह की जांचों के नाम पर अलग से रुपये जमा कराए जाते हैं।

एक लाख जमा किए
नौबस्ता फैमिली अस्पताल में भर्ती उन्नाव पुरवा में तैनात वेटनरी डॉ. आरडी अहरवाल के बेटे डॉ. शैलेश अहरवाल ने बताया कि अस्पताल प्रबंधन लूट खसोट मचाए है। उन्होंने पिता के इलाज के लिए एक लाख रुपये जमा किए थे। अस्पताल में न तो रेट लिस्ट चस्पा है न ही नोडल अफसरों के नंबर। मरीज की हालत बताने के लिए कोई व्यवस्था नहीं।
विज्ञापन

एसआईएस हॉस्पिटल कल्याणपुर
कल्याणपुर आवास विकास के एसआईएस हॉस्पिटल के बाहर कोविड मरीज के तीमारदारों ने बताया कि दो तीन दिन में एक बार मरीज की हालत पता चल जाती है। मरीज को देखने के लिए किसी भी प्रकार की एलसीडी नहीं लगाई गई है। पड़ताल में अस्पताल के बाहर कोई बेड और रेट का बोर्ड भी नहीं लगा था।

फार्च्यून हॉस्पिटल शारदा नगर
शारदा नगर स्थित फार्च्यून हॉस्पिटल के बाहर खड़े तीमारदारों ने बताया कि एलसीडी तो नहीं लगी लेकिन वार्ड ब्वाय फोन पर मरीज से बात करा देता है, जिससे हमें हालचाल मिल जाता है। इस हॉस्पिटल में भी कोई बेड और रेट को लेकर बोर्ड नहीं लगा था।

निजी अस्पतालों की मनमानी पर अंकुश लगाने के लिए प्रति दिन दो अस्पतालों का औचक निरीक्षण किया जा रहा है। जहां-जहां कमियां मिलीं, उन्हें नोटिस जारी किया गया है। प्रशासन के निर्देश सभी अस्पतालों के लिए समान हैं। तीमारदारों से शिकायत मिली तो कार्रवाई की जाएगी। - आलोक तिवारी, जिलाधिकारी

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें