उर्सला अस्पताल की सर्जिकल ओपीडी में अव्यवस्थाओं का बोलबाला
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लगभग दो महीने बाद शुरू हुई उर्सला अस्पताल की सर्जिकल ओपीडी अव्यवस्थाओं की भेंट चढ़ गई। कल्याणपुर से अपने बेटे शिवा को लेकर उर्सला पहुंचे पिता कैलाश बेटे के पैर में घाव पर खुद पट्टी करते नजर आए। उन्होंने बताया कि 11 अप्रैल को बेटे का ई रिक्शा से एक्सीडेंट हो गया था। तब से प्राइवेट डॉक्टर को दिखा रहे थे।
यहां ओपीडी का पर्चा बनवाने के बाद डॉक्टर सुरेंद्र बाबू को दिखाया तो उन्होंने दवाएं लिख दीं। पट्टी खोलने के बाद उन्होंने ड्रेसिंग रूम जाकर नई पट्टी करवाने को बोला। उन्होंने बताया कि ड्रेसिंग रूम गए तो ताला पड़ा मिला। इस पर फिर डॉक्टर से ही पट्टी लेकर खुद घाव पर लगाई। सीएमएस डॉ. अनिल निगम ने बताया कि शुक्रवार को उर्सला ओपीडी में 450 मरीज देखे गए, वहीं चार मरीजों का ऑपरेशन किया गया।
दो महीने बाद नंबर आया, अब कह रहे जांचें कराओ
घंटाघर के रहने वाले बाबूलाल का प्रॉस्टेट ग्लैंड का ऑपरेशन होना है। उन्होंने बताया कि 12 अप्रैल को ऑपरेशन के लिए आए थे, तो जांचें लिखी थीं। उसके बाद से ओपीडी बंद हो गई थी। दो महीने से पेशाब करने में बहुत समस्या हो रही है। निजी अस्पताल वाले बहुत पैसा मांग रहे हैं। ऐसे में आज यहां डॉक्टर को दिखाया तो उन्होंने फिर से जांचें लिख दीं और रिपोर्ट आने के बाद ऑपरेशन के लिए आने को बोला।
ठेले पर बैठकर ओपीडी और इमरजेंसी के बीच भटका मरीज
परेड निवासी शंभू दयाल शुक्रवार सुबह घर के बाहर गिरकर चुटहिल हो गए। मोहल्ले वाले उनको एक ठेले पर बैठा कर उर्सला इमरजेंसी लेकर आए। इमरजेंसी से डॉक्टरों ने ओपीडी के लिए रेफर किया, ओपीडी में आने के बाद डॉक्टर बोले कि इमरजेंसी से लिखा के लाओ तब एक्सरे होगा। वह ठेले पर बैठकर इमरजेंसी और ओपीडी के बीच दोपहर तक भटकते रहे।