ये 26 मौतें न मंगलवार और न ही सोमवार के आंकड़े का हिस्सा बनीं। इस तरह 26 मौतें बट्टे खाते में चली गईं। इसी तरह सोमवार को 57 मौतों की रिपोर्ट जारी की गई। लेकिन, 24 घंटे के आंकड़े में सिर्फ छह मौतें बताई गईं।
बाकी की 51 मौतें किस दिन हुईं, यह स्वास्थ्य विभाग ही जाने। मई के आंकड़ों में ये मौतें अब किसी दिन में नहीं जोड़ी गईं। इसी तरह रविवार को 18 मौत हुई थीं, लेकिन इस दिन के आंकड़े में सिर्फ सात मौत हैं। 11 मौतें कब हुईं, यह भी घपले में गईं। मौत के आंकड़े छिपाने का यह खेल लगातार किया जा रहा है।
मौत तुरंत अपडेट नहीं कर रहे अस्पताल
कोविड अस्पताल मौतों का आंकड़ा तुरंत अपडेट नहीं कर रहे हैं। इसके पीछे कहानी यह बताई जा रही है कि उनसे जवाब तलब हो जाता है। इस वजह से वह देर से अपडेट करते हैं। स्वास्थ्य मंत्री, अपर मुख्य सचिव सभी के आदेश हैं पोर्टल पर आंकड़े तुरंत अपडेट किए जाएं। कुछ अस्पताल लिखापढ़ी में देर होने की बात कर रहे हैं, लेकिन यह झूूठ है। प्रतिदिन मौत का आंकड़ा अधिक होने पर शासन सख्ती करने लगता है। इस घपले से अधिकारी और अस्पताल संचालक बच जाते हैं।
बहुत से ऐसे रोगियों की मौत हो जाती है, जिनकी जांच रिपोर्ट नहीं आ पाती। जब रिपोर्ट आती है तो पोर्टल पर आंकड़ा अपडेट कर दिया जाता है। इससे देर हो जाती है। इसके अलावा कुछ अस्पतालों में डाटा फीडिंग में देर हो जाती है। इससे भी आंकड़ा अपलोड होने में देर होती है। देर से अपलोड होने वाले केस को कुल संख्या में जोड़ दिया जाता है।- डॉ. एके सिंह, कार्यवाहक मुख्य चिकित्साधिकारी