अब प्राइवेट लिमिटेड कंपनी, एलएलपी, पार्टनरशिप फर्म और कोऑपरेटिव सोसाइटी को भी स्टार्टअप के रूप में मान्यता दी जा सकेगी। स्टार्टअप की वैधता अवधि को 10 वर्ष तक बढ़ाया गया है। पहले यह अवधि 10 साल थी। इसके अलावा टर्नओवर सीमा को 100 करोड़ से बढ़ाकर 200 करोड़ कर दिया गया है। इस संबंध में चार फरवरी को उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग की ओर से अधिसूचना जारी की गई है। कानपुर समेत प्रदेश में 19 हजार के करीब स्टार्टअप विभाग में पंजीकृत हैं। भारतीय कंपनी सचिव संस्थान, कानपुर चैप्टर के पूर्व अध्यक्ष सीएस कौशल सक्सेना ने बताया कि स्टार्टअप इंडिया के लिए नया ढांचा लागू किया गया है।
कॉरपोरेट अनुपालन के दृष्टिकोण से ये बड़ा सुधार है। भारत सरकार ने स्टार्टअप इंडिया पहल के तहत स्टार्टअप की परिभाषा और मान्यता प्रणाली में बदलाव किया है। इस अधिसूचना को कॉरपोरेट गवर्नेंस और अनुपालन (कंप्लाइंस) के दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नई व्यवस्था के तहत अब प्राइवेट लिमिटेड कंपनी, लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप (एलएलपी), पार्टनरशिप फर्म और कोऑपरेटिव सोसाइटी को भी स्टार्टअप के रूप में मान्यता दी जा सकेगी। स्टार्टअप की वैधता अवधि को 10 वर्ष तक बढ़ाया गया है। टर्नओवर सीमा को 200 करोड़ किया गया है। पहली बार डीप टेक स्टार्टअप को औपचारिक रूप से एक पृथक श्रेणी में शामिल किया गया है।