संयुक्त टीम ने गतिविधियों की पड़ताल शुरू कर दी
शुक्रवार सुबह एएनटीएफ की लखनऊ इकाई की सीओ नित्या गोस्वामी के नेतृत्व में टीम कानपुर पहुंची और आरोपी से पूछताछ की। मिहिर ने बताया कि ट्रांसपोर्ट नगर में राजधानी इंटरस्टेट ट्रांसपोर्ट के गोदाम में चार साल से कोडीन सिरप का भंडारण कर अलग-अलग स्थानों पर भेजा जा रहा था। उसने टीपी नगर के कुछ ट्रांसपोर्टरों के नाम भी बताए, जिनकी इस धंधे में संलिप्तता की आशंका है। इसके बाद संयुक्त टीम ने उनकी गतिविधियों की पड़ताल शुरू कर दी।
जहां रात भर रहती थी हलचल, वहां लगे ताले
एएनटीएफ स्थानीय मुखबिरों की मदद से संदिग्ध ट्रांसपोर्टरों की जानकारी जुटा रही है। जांच में सामने आया कि कुछ ट्रांसपोर्टों पर छापेमारी के बाद ताले लटक गए हैं, जबकि पहले वहां रात में भी ट्रकों की आवाजाही होती थी। ऐसे ट्रांसपोर्टरों की सूची तैयार की जा रही है।
पुराने मामले से भी जुड़ सकते तार
एएनटीएफ दरोगा अमन सिंह की तहरीर पर बाबूपुरवा थाने में मिहिर, आशुतोष तिवारी, सुमित यादव और पंकज धीर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने बताया कि मामले की विवेचना स्थानीय थाने के बजाय क्राइम ब्रांच करेगी। इससे पहले औषधि की आड़ में एनडीपीएस श्रेणी की दवाओं की आपूर्ति के मामले में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन ने छापेमारी की थी। जांच के बाद फीलखाना के पटकापुर निवासी अग्रवाल ब्रदर्स के मालिक विनोद अग्रवाल, उनके बेटे शिवम समेत 11 आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई थी। इस मामले में क्राइम ब्रांच पांच हजार पन्नों की चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। अब दोनों मामलों के बीच संभावित संबंधों की भी जांच की जाएगी।
एलआईयू की निगरानी पर उठे सवाल
करीब 2.97 करोड़ रुपये की सिरप बरामद होने के बाद स्थानीय खुफिया इकाई (एलआईयू) की सक्रियता पर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि चार साल से प्रतिबंधित दवाओं का भंडारण और परिवहन हो रहा था, लेकिन एलआईयू को इसकी भनक तक नहीं लगी।