अर्बन फ्लड एवं स्टार्म वाटर योजना के तहत बनाई कार्ययोजना
दो साल पहले क्षेत्रवासियों ने एनजीटी में शिकायत की। एनजीटी ने समाधान के लिए कहा था। इसके बाद शासन की तरफ गठित समिति ने जल निगम की निर्माण इकाई सी एंड डीएस से इसके निर्माण की कार्ययोजना बनवाई। नगर निगम ने अर्बन फ्लड एवं स्टार्म वाटर योजना के तहत सीओडी नाले के निर्माण की कार्ययोजना बनाई। अधिकारियों के अनुसार सीओडी नाला किदवईनगर से राष्ट्रीय राजमार्ग में यशोदानगर बाईपास के पास तक 9.9 मीटर और वहां से पांडु नदी तक 11.70 मीटर चौड़ा और करीब साढ़े चार मीटर गहरा है।
पानी निकलने में तीन-चार घंटे लगते हैं
6200 मीटर लंबे यह नाला कच्चा है। मीरपुर मुख्य मार्ग और मेट्रो स्टेशन से लगा यह नाला पांडु नदी में गिरता है। इस नाले के माध्यम से 26 वार्डों का पानी निकलता है। नाला कच्चा और लेवल कई जगह सही न होने के कारण पानी का प्रवाह सही से नहीं होता जिससे बाबूपुरवा, बेगमपुरवा, किदवईनगर, ट्रांसपोर्टनगर, राखी मंडी, मुंशीपुरवा, नौबस्ता सहित अन्य क्षेत्रों में बारिश के दौरान जलभराव होता है। बारिश बंद होने के बाद पानी निकलने में तीन-चार घंटे लगते हैं।
व्यापारियों और एनएचएआई के परियोजना निदेशक भी कर चुके नाला पक्का करने का आग्रह
जलभराव के निराकरण के लिए जिला व्यापार बंधु की जुलाई और अगस्त में हुईं विभिन्न बैठकों में व्यापारियों ने नाला पक्का करने का अनुरोध किया था। एनएचएआई के परियोजना निदेशक पंकज यादव ने पांच जुलाई को कानपुर-सागर राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे स्थित इस कच्चे नाले को पक्का कराने का अनुरोध किया ताकि राजमार्ग को कटाव से बचाया जा सके।
उफान पर होने पर पांडु नदी का पानी बैक फ्लो होकर नाले में आता है
बाढ़ के समय पांडु नदी से पानी बैक फ्लो होकर इस नाले में आता है। इससे मछरिया, राजीव विहार सहित विभिन्न मोहल्लों में जलभराव होता है। बैक फ्लो बहाव को रोकने के लिए फ्लड पंपिंग स्टेशन में आरसीसी चैनल के निर्माण कार्य का प्रावधान किया गया है। दावा है कि इससे जलभराव की समस्या न के बराबर होगी और सड़क की कटान भी रोकी जा सकेगी।
सीओडी नाले को पक्का करने के लिए 199.94 करोड़ का प्रस्ताव तैयार किया है। इसे नगर आयुक्त को भेज दिया गया है। स्वीकृति मिलते ही निर्माण कराया जाएगा। -सर्वेश कुमार वर्मा, प्रोजेक्ट मैनेजर, सी एंड डीएस