हेयर ट्रांसप्लांट से मौत का मामला
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हेयर ट्रांसप्लांट के बाद हुई दो इंजीनियरों की मौत के बाद शहर में चल रहे छोटे-छोटे सेंटरों ने अपने बोर्ड हटा लिए। कल्याणपुर शिवली रोड, पनकी और नौबस्ता में संचालित कई सेंटरों से बोर्ड उतार दिए गए हैं। जिन सेंटरों में बोर्ड लगे हुए हैं, वहां पर हेयर ट्रांसप्लांट बंद कर दिया गया है। एंपायर क्लीनिक में लगा बोर्ड पहले ही हटा दिया गया था। क्लीनिक से जुड़ी जानकारी इंटरनेट से भी हटा ली गई। कई और सेंटरों ने अपना डाटा इंटरनेट से हटा लिया।
इंडियन डेंटल एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. अवधेश तिवारी ने बताया कि एमडीएस (मैग्जीलोफेशियल सर्जन) ही इसे कर सकते हैं। एमडीएस में ट्राइकोलॉजी प्रशिक्षण दिया जाता है, जिसमें विशेष रूप से बाल और खोपड़ी के विकारों से संबंधी अध्ययन शामिल हैं।
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के सर्जरी विभाग के प्रोफेसर व प्लास्टिक सर्जन डॉ. प्रेम शंकर ने बताया कि इस सर्जरी को प्लास्टिक सर्जन और डर्मेटोलॉजिस्ट ही कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि हेयर क्राफ्टिंग सर्जरी जटिल है। सर्जरी आठ से 12 घंटे चलती है। त्वचा रोग विभागाध्यक्ष डॉ. डीपी शिवहरे ने बताया कि हेयर ट्रांसप्लांट के लिए विशेष प्रशिक्षित डर्मेटोलॉजिस्ट के साथ स्टाफ भी प्रशिक्षित होना चाहिए।
ये तीन विशेषज्ञ कर सकते हैं हेयर ट्रांसप्लांट
एसीएमओ (नर्सिंगहोम) डॉ. रमित रस्तोगी ने बताया कि प्लास्टिक सर्जन, डर्मेटोलाजिस्ट और एमडीएस डिग्री वाला मेग्लो फेशियल सर्जन हेयर ट्रांसप्लांट कर सकता है। नेशनल मेडिकल कमीशन की गाइडलाइन में प्लास्टिक सर्जन और डर्मेटोलाजिस्ट को हेयर ट्रांसप्लांट करने के लिए कहा गया है। वहीं डेंटल काउंसिल ऑफ इंडिया ने मेग्लो फेशियल सर्जन को हेयर ट्रांसप्लांट करने की अनुमति दी है। इस तरह प्लास्टिक सर्जन, डर्मेटोलाजिस्ट और एमडीएस मेग्लो फेशियल सर्जन हेयर ट्रांसप्लांट कर सकते हैं।