कुछ दिन पहले जहां हम स्मार्ट सिटी के दर्जे से चूके तो अब गंदगी के मामले में कानपुर की रैंकिंग और हाई हो गई। पिछले साल कानपुर 38 वें नंबर पर था तो इस बार जारी ताजा सर्वे आंकड़ों के मुताबिक यह 45 पर पहुंच गया यानी कानपुर और गंदा हो गया।
संबंधित अधिकारियों और विशेषज्ञों का मानना है कि पर्याप्त साधन, संसाधन न होने और पब्लिक में जागरूकता न होने के कारण ये हालात बने हैं। शहर से रोज 1200 मीट्रिक टन कूड़ा निकलता है, पर साफ किया जाता है मात्र 1050 मीट्रिक टन। बाकी कूड़ा नालियों, नालों में जाता है।
स्वच्छ भारत मिशन के तहत शहरी विकास मंत्रालय ने 10 लाख से ज्यादा आबादी वाले 73 शहरों का साफ - सफाई के मामले में सर्वे कराकर सोमवार को सूची जारी की। इस सूची के अनुसार मैसूर देश का सबसे अच्छा शहर है, जबकि कानपुर को 45 वीं रैंक मिली है।
इस सूची में उत्तर प्रदेश में पहला स्थान इलाहाबाद (22 वां स्थान) को मिला। 28 वें पायदान के साथ लखनऊ दूसरे नंबर पर है, जबकि कानपुर को 45 वें स्थान के साथ तीसरे नंबर पर संतोष करना पड़ा। यहां यह सर्वे बीती 5 से 7 जनवरी तक हुआ था।
वहीं नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. पंकज श्रीवास्तव का कहना है कि हम मैसूर से तो तुलना नहीं कर सकते क्योंकि वह बेलडेवलप्ड सिटी है। हम सीमित संसाधनों में अधिकतम प्रयास कर रहे हैं। चूंकि हमारा कूड़ा निस्तारण प्लांट चालू नहीं है। कर्मियों, संसाधनों की भी कमी है। यदि साधन - संसाधन पर्याप्त मिल जाएं और पब्लिक में जागरूकता बढ़े तो हम नंबर-वन हो सकते है।
पिछड़ने की वजह
पूरे शहर में डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन न होना। पूरा कूड़ा न उठना। कूड़ा निस्तारण प्लांट ठप होना। कंपोस्ट प्लांट न होना। लोगों में साफ - सफाई के प्रति जागरूकता में कमी। तमाम घरों में शौचालय न होना, खुले में शौच जाना। पब्लिक टाॅयलेट की व्यवस्था का अभाव। संसाधनों, कर्मियों की कमी।