भीतरगांव सीएचसी में नवजात के साथ दंपति व चिकित्साधीक्षक डॉ. मनीष तिवारी
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डॉक्टरों को धरती का भगवान यूं ही नहीं कहा जाता है। नवजात की टूटतीं सांसों की डोर को बचाने के लिए सीएचसी के डॉक्टरों ने उसे हैलट रेफर किया। हैलट में बेड खाली न होने पर उसे केजीएमयू रेफर किया गया। इस बीच उसकी तबीयत बिगड़ने लगी तो डॉक्टरों और सीएचसी स्टाफ ने मिलकर 32 हजार जुटाए और उसे निजी अस्पताल में भर्ती कराया। अब जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ हैं।
मडेपुर गांव निवासी राजेश की पत्नी अनीता का नौ सितंबर को भीतरगांव सीएचसी में डाॅ. प्रमिला पार्या और स्टॉफ नर्स मनुजा सचान ने दोपहर तीन बजे ऑपरेशन से प्रसव कराया। नवजात बेटे का वजन मात्र एक किलो 80 ग्राम था। बच्चे को सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। परीक्षण में बच्चा श्वांस संकट सिंड्रोम से वह ग्रसित मिला। उसे हैलट रेफर किया गया। वहां डॉक्टर बेड खाली न होने की बात कहकर लखनऊ केजीएमयू रेफर करने लगे।