सेंट्रल स्टेशन का पानी पीने लायक नहीं है। यहां लगे अलग-अलग नलों से लिए गए पानी के सभी 12 सैंपल जांच में फेल हो गए हैं। पानी में हानिकारक बैक्टीरिया पाए गए हैं। इसके अलावा पानी में क्लोरीन की मात्रा शून्य पाई गई है। इसका मतलब बिना शुद्धिकरण (क्लोरिनेशन) के ही पेयजल सप्लाई किया जा रहा था। मामले में जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब तलब किया गया है।
सेंट्रल स्टेशन पर एक से नौ नंबर तक प्लेटफार्म हैं। इन प्लेटफार्मों पर करीब 450 नल लगे हैं। इनसे ही यात्रियों के लिए पीने का पानी आता है, जबकि इन नलों में तीन टंकियों से पानी की सप्लाई होती है, जिन्हें भरने के लिए सात पंप लगे हैं। पंप से टंकी तक पानी की सप्लाई से पहले क्लोरिनेशन किया जाता है। इसका जिम्मा मरकरी इंटरनेशनल कानपुर के पास है।
इसके लिए हर तीन माह में करीब डेढ़ लाख रुपये का भुगतान इस कंपनी को किया जाता है। अब कहा जा रहा है कि पेयजल में ही बड़ा गोलमाल किया गया है। दरअसल पेयजल की जांच के लिए गत आठ मई को मुख्य स्वास्थ्य निरीक्षक एके कौशल, चंद्रशेखर पटेल और कामरान ने सेंट्रल स्टेशन के विभिन्न स्थानों से 12 सैंपल भरे थे।
इलाहाबाद स्थित लैब में सैंपलों का परीक्षण किया गया।
वहां से मुख्य स्वास्थ्य निरीक्षक के पास जो रिपोर्ट आई, वह चौंकाने वाली निकली। जांच में सभी 12 सैंपल फेल बताए गए हैं। मुख्य स्वास्थ्य निरीक्षक ने संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब करते हुए डिप्टी सीटीएम को मामले से अवगत कराया है।
चीफ सीनियर सेक्शन इंजीनियर बालकृष्ण ने बताया कि मुझे पानी के सैंपल फेल होने की जानकारी नहीं है। वैसे पानी का क्लोरिनेशन रोजाना किया जाता है लेकिन यह सुनकर आश्चर्य जरूर हो रहा है। पिछले पांच साल से तो आज तक पानी के सैंपल फेल नहीं हुए।