नाम बदलने का निर्णय रेलवे बोर्ड करता है
रेलवे विशेषज्ञ कहते हैं कि यह औपनिवेशिक काल की एक निशानी है, जिसे आधुनिक बदलाव की लहर के बावजूद नहीं छुआ गया। रेलवे यातायात प्रबंधक आशुतोष सिंंह कहते है कि कोड बदलना सिर्फ एक प्रतीकात्मक कदम नहीं होता। इससे टिकटिंग सिस्टम, मालगाड़ी रजिस्टर, आरक्षण डेटा, रूट डायग्राम, लाखों ऐतिहासिक रिकॉर्ड और अंतरराष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स में व्यापक बदलाव करना पड़ता है। यही वजह है कि भारतीय रेलवे कोड को बदलने से आमतौर पर बचती है। हालांकि नाम बदले जा सकते है, जिसका निर्णय रेलवे बोर्ड करता है।
कानपुर रेलवे स्टेशन का इतिहास
- 1859 में कानपुर में रेलवे लाइन बिछाई गई। उस समय क्षेत्र का नाम कॉनपोर लिखा जाता था। 1900 से 1925 के बीच यह क्षेत्र ब्रिटिश आर्मी कैंप और बैरक क्षेत्र के नाम से जाना जाता था। रेलवे का महत्वपूर्ण स्थान बैरक क्षेत्र था, जिसे कॉनपोर नार्थ बैरक कहा जाता था।
- 1928 में नया टर्मिनल स्टेशन बनना शुरू हुआ।
- 1930 में रेलवे स्टेशन जनता के लिए खोला गया।
- देश आजाद होने के बाद कॉनपोर स्टेशन का नाम बदलकर कानपुर कर दिया गया।