दोनों समितियों को लेकर उठे थे सवाल
निर्माण कार्य के लिए एक समिति और निर्माण के बाद रखरखाव और संचालन के लिए दूसरी समिति बनाई गई थी। दूसरी समिति में दस सदस्य थे, जिनमें छह नगर निगम अभियंत्रण, संपत्ति व दूसरे विभागों से जुड़े थे। इसके अलावा चार लोग कानपुर इंडस्ट्रियल जूनियर चैंबर इंटरनेशनल (केआईजेसीआई) कंपनी के थे। पिछले दिनों मंगल भवन से जुड़ी इन दोनों समितियों को लेकर सवाल उठे थे।
समितियों के कामकाज में कई खामियां मिलीं
आरोप था कि दूसरी समिति में बाहरी लोग भी हैं। इसकी शिकायत सांसद रमेश अवस्थी ने मंडलायुक्त से की थी। मंडलायुक्त ने तत्कालीन एडीएम सिटी व पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता को मामले की जांच के आदेश दिए। जांच के बाद जो रिपोर्ट मंडलायुक्त को दी गई, उसमें समितियों के कामकाज में कई खामियां मिलीं।
दोनों समितियां भंग करने का आदेश दिया
यह रिपोर्ट पांच सितंबर को नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय को भेजी गई, जिसके बाद 21 सितंबर को उन्होंने दोनों समितियां भंग करने का आदेश दिया। इसके बाद मंगलवार को संपत्ति विभाग की ओर से दोनों ही समितियों को तत्काल प्रभाव से निरस्त करने का आदेश जारी कर दिया।
रखरखाव, संचालन समिति में ये लोग
महापौर या उनकी ओर से नामित प्रतिनिधि, नगर आयुक्त या उनकी ओर से नामित प्रतिनिधि, केआईजेसीआई के वर्तमान वर्ष के अध्यक्ष, केआईजेसीआई के पूर्व अध्यक्ष, प्रत्येक वर्ष की प्रथम सामान्य सभा में नामित एक प्रतिनिधि, केआईजेसीआई की ओर से विशेष आमंत्रित सदस्य अमित पांडेय।
निर्माण कार्य से जुड़ी समिति में ये लोग
महापौर या उनकी ओर से नामित प्रतिनिधि, नगर आयुक्त या उनकी ओर से नामित प्रतिनिधि, नगर निगम के मुख्य अभियंता, नगर निगम के अधिशासी अभियंता, 2025 के केआईजेसीआई अध्यक्ष प्रणीत अग्रवाल, कम्युनिटी सलाहकार विकास जायसवाल, केआईजेसीआई के पूर्व अध्यक्ष अमित गर्ग, पूर्व अध्यक्ष आकाश गोयनका, पूर्व अध्यक्ष राहुल अग्रवाल, केआईजेसीआई के सचिव अविरल जैन, चेयरपर्सन नेहा ऐश्वर्या गर्ग, केआईजेसीआई की ओर से विशेष आमंत्रित सदस्य अमित पांडेय।
मंगल भवन से जुड़ी दोनों समितियां तत्काल प्रभाव से भंग कर दी गई हैं। अब इसका संचालन और रखरखाव सहित अन्य दायित्वों का निर्वाहन नगर निगम का संपत्ति विभाग ही करेगा। -अर्पित उपाध्याय, नगर आयुक्त