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कानपुर: रजिस्ट्रेशन के समय जो खामियां नहीं देखी, उन्हीं पर कर दिया ब्लैकलिस्ट, जांच में खुली पोल, पढ़ें मामला

Sun, 20 Sep 2026 10:36 AM IST
Himanshu Awasthi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur News: कानपुर नगर निगम में अधूरे दस्तावेजों के आधार पर चहेती फर्मों का पंजीकरण और नवीनीकरण करने का बड़ा घोटाला उजागर हुआ है। सीडीओ अभिनव जे जैन की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय जांच समिति ने रैंडम चेकिंग में पाया कि जरूरी प्रमाणपत्रों और एनओसी के बिना ही फर्मों को पंजीकृत किया गया और पिछले सात वर्षों से 24 चहेती फर्मों को ही बड़े काम दिए जा रहे थे। 
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कानपुर नगर निगम - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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कानपुर नगर निगम में अधूरे कागजों के आधार पर फर्मों का पंजीकरण और नवीनीकरण किए जाने का मामला सामने आया है। बाद में इन्हीं दस्तावेजों में कमियां मिलने पर कुछ फर्मों को ब्लैकलिस्ट भी किया गया। सीडीओ अभिनव जे जैन की अध्यक्षता वाली जांच कमेटी ने नगर निगम से उपलब्ध कराई गईं पंजीकरण की 20 फाइलों में से रैंडम आधार पर आठ की जांच की।

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इनमें कई फाइलों में जरूरी दस्तावेज नहीं मिले। कमेटी ने पंजीकरण प्रक्रिया में एकरूपता नहीं होने और नियमों के पालन में गड़बड़ी की रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को सौंप दी है। नगर निगम में कुल 509 फर्में पंजीकृत हैं। फर्म पंजीकरण से लेकर टेंडर देने तक नियमों के पालन में गड़बड़ी की शिकायतें शासन स्तर तक पहुंचाई।

तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित की थी
इसके बाद मंडलायुक्त ने सीडीओ की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित की थी। कमेटी ने करीब 20 दिन पहले नगर निगम से वर्ष 2024-25 और 2025-26 में हुए काम, टेंडर और पूरी प्रक्रिया की फाइलें मांगी थीं। हालांकि नगर निगम ने सभी दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए और फर्म पंजीकरण से संबंधित 20 फाइलें ही अधिकारियों को भेजीं।

प्रमाणपत्र और जरूरी एनओसी तक नहीं मिले
जांच में पाया गया कि पंजीकरण के दौरान दस्तावेजों के सत्यापन में एकरूपता नहीं थी। फाइलों में आयकर, टर्नओवर, योग्यता से जुड़े प्रमाणपत्र और जरूरी एनओसी तक नहीं मिले। मुख्यमंत्री के निर्देश पर नगर निगम में भ्रष्टाचार की जांच शुरू होने के बाद ऐसी फर्मों को ब्लैकलिस्ट करने की कार्रवाई की गई। इनमें से कुछ फर्में अधूरे दस्तावेजों के बावजूद 12 से 15 साल से नगर निगम में काम कर रही हैं।

छह जोनों में 24 फर्मों का दबदबा
जांच कमेटी ने नगर निगम के बड़े कामों में पूलिंग के आरोपों को भी जांच के दायरे में लिया है। पंजीकरण में हॉटमिक्स प्लांट की अनिवार्यता के चलते नई बड़ी फर्मों के आवेदनों में कमियां निकालकर उन्हें बाहर करने और कमियां होने के बावजूद चुनिंदा फर्मों का पंजीकरण करने की बात सामने आई है। करीब 24 बड़ी फर्मों के नाम इस मामले में सामने आने की बात कही जा रही है। पिछले सात वर्षों से नगर निगम के छह जोनों में होने वाले बड़े कामों में इन्हीं फर्मों की भागीदारी रहने की बात भी कही जा रही है।

हॉटमिक्स प्लांट की अनिवार्यता खत्म
नगर निगम में ज्यादातर सड़कें हॉटमिक्स प्लांट से बनती रही हैं। ऐसे कार्यों के टेंडर में हॉटमिक्स प्लांट की शर्त रखी गई थी। गड़बड़ी की शिकायतों के बाद जांच शुरू होने पर नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय ने सड़क निर्माण के लिए हॉटमिक्स प्लांट की अनिवार्यता खत्म कर दी।

पांच ठेकेदारों पर एफआईआर, दो गिरफ्तार
नगर निगम में हुए टेंडर घोटाले में 25 अगस्त को पांच ठेकेदारों पर एफआईआर हुई थी। इनमें दिलीप बाजपेई इंटरप्राइजेज, अजय एंटरप्राइजेज, पारसनाथ बिल्डर, तिरुपति और कैला देवी इंटरप्राइजेज शामिल हैं। नगर निगम ने इन फर्मों को ब्लैकलिस्ट भी किया था। ठेकेदार संदीप जैन और रज्जन बाजपेई को गिरफ्तार किया गया था। मामले में फरार गोविंद शर्मा को बाद में हाईकोर्ट से गिरफ्तारी पर स्टे मिला।

तीन कर्मचारी निलंबित, तीन लिपिक इधर-उधर
फर्म पंजीकरण में निगरानी न करने और दस्तावेजों का बिना सत्यापन पंजीकरण कराने के मामले में नगर निगम अभियंत्रण विभाग के अवर अभियंता अमनदीप सिंह, अवर अभियंता बालेंद्र कुमार और वरिष्ठ लिपिक भूपेंद्र सिंह को निलंबित किया जा चुका है। इसके अलावा वर्षों से नगर आयुक्त के व्यक्तिगत सहायक की सीट पर तैनात लिपिक संजय कटियार, रहमान और दिनेश प्रसाद का तबादला किया गया था। मार्गप्रकाश मामले में नगर आयुक्त ने 12 कर्मचारियों को निलंबित किया है। मामले में एसआईटी, मंडलायुक्त की ओर से सीडीओ की अध्यक्षता में गठित समिति और नगर आयुक्त की ओर से गठित कमेटी अलग-अलग जांच कर रही हैं।

पुरानी कमेटी भंग, नई गठित
फर्म का पंजीकरण करने से पहले अभिलेखों की जांच के लिए नगर निगम में कमेटी बनी थी। यह आवेदन पत्रों और दस्तावेजों की जांच कर फाइल मुख्य अभियंता के पास भेजती थी। इसके बाद फर्म के पंजीकरण या आवेदन निरस्त करने का निर्णय होता था। कमेटी में अभियंताओं के साथ दो पार्षद भी शामिल थे। जांच में इस प्रक्रिया पर सवाल उठने के बाद नगर आयुक्त ने पुरानी कमेटी भंग कर दी है। अब अपर नगर आयुक्त की अध्यक्षता में नई फर्म पंजीकरण कमेटी गठित की गई है।
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पहले चरण में फर्मों के पंजीकरण को लेकर जांच की गई है। इसकी रिपोर्ट तैयार कर उच्च अधिकारियों को भेज दी गई है। अब टेंडर प्रक्रिया में स्वीकृत और निरस्त किए गए टेंडरों के कारणों की जांच होगी। जल्द पूरी जांच कर रिपोर्ट सौंपी जाएगी।  -अभिनव जे जैन, सीडीओ
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