सरकार की ओर से कॉमर्शियल सिलिंडरों पर रोक लगाए जाने के बाद होटल, रेस्टोरेंट, मिठाई और गेस्ट हाउस संचालकों की समस्याएं बढ़ती जा रही हैं। कालाबाजारी भी शुरू हो गई है। 19 किलो का सिलिंडर पहले 1700 रुपये का था, अब ब्लैक में 2000 हजार रुपये का मिल रहा है। शहर में छोला-भटूरा, पूड़ी-सब्जी, जलेबी, खस्ता, समोसा का असंगठित क्षेत्र का भी प्रतिदिन करोड़ों का व्यापार होता है। सबसे ज्यादा मार इन पर भी पड़ रही है। इसके अलावा सभी प्रमुख मिठाई, नमकीन कारोबारियों के सामने भी बड़ा संकट आ गया है।
एक बड़ी सप्लाई चेन के फ्रेंचाइजी संचालक ने बताया कि होली पड़ने के कारण सिलिंडरों का स्टाक खत्म हो गया है। कोयला, लकड़ी या डीजल भट्ठी का इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं। इसलिए पूड़ी, जलेबी, इमरती, छोला-भटूरा का काम बंद कर दिया गया है। उत्तर प्रदेश नमकीन निर्माता संघ के अध्यक्ष निर्मल त्रिपाठीने बताया कि नमकीन के 25 प्रतिशत कारखाना गैस से ही चलते हैं। गैस मिल नहीं रही है। कारखानों में बंदी की तलवार लटक रही है। डीजल भट्ठी और इलेक्टि्रक भट्ठी बनवाने के ऑर्डर दिए हैं।